दिल्ली के नजफगढ़ झील में एक अत्यंत दुर्लभ साइबेरियाई प्रवासी पक्षी, शार्प-टेल्ड सैंडपाइपर (Sharp-tailed Sandpiper) देखा गया है। यह घटना भारत में इस प्रजाति के रिकॉर्ड के लिहाज से ऐतिहासिक है और दिल्ली की समृद्ध जैव विविधता को रेखांकित करती है।
- नजफगढ़ झील में शार्प-टेल्ड सैंडपाइपर (Calidris acuminata) का दिखना भारत में पिछले 150 वर्षों में केवल पांचवीं बार दर्ज किया गया है।
- यह प्रजाति साइबेरिया में प्रजनन करती है और ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड की ओर प्रवास करती है।
- IUCN की रेड लिस्ट में इसे 'असुरक्षित' (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है।
- दिल्ली अपनी पक्षी विविधता में दुनिया की राष्ट्रीय राजधानियों में नैरोबी के बाद दूसरे स्थान पर है।
दिल्ली-एनसीआर के प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए एक अत्यंत उत्साहजनक खबर सामने आई है। हाल ही में नजफगढ़ झील में एक अत्यंत दुर्लभ साइबेरियाई प्रवासी पक्षी, शार्प-टेल्ड सैंडपाइपर (Calidris acuminata) को देखा गया है। संरक्षणवादी अक्षित दुआ द्वारा दर्ज किया गया यह दृश्य न केवल स्थानीय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत में इस दुर्लभ प्रजाति के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में एक नया अध्याय जोड़ता है।
ऐतिहासिक महत्व और दुर्लभता
शार्प-टेल्ड सैंडपाइपर का भारत में दिखना कोई सामान्य घटना नहीं है। पिछले लगभग डेढ़ शताब्दी के रिकॉर्ड को देखें तो यह इस प्रजाति का भारत में केवल पांचवां दर्ज मामला है। ऐतिहासिक रूप से, इस पक्षी को 1880 में गिलगित में, 1915 में तमिलनाडु के वंडालूर में, 2004 में छत्तीसगढ़ में और 2019 में फिर से नजफगढ़ के दलदली इलाकों में देखा गया था। यह दुर्लभता दर्शाती है कि यह पक्षी आमतौर पर भारत के मार्ग में नहीं आता है, क्योंकि इसका मुख्य प्रवास मार्ग साइबेरिया से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की ओर है।
यह क्यों मायने रखता है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों का दिखना शहरी आर्द्रभूमि (Wetlands) के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। यदि एक अत्यंत दुर्लभ प्रवासी पक्षी दिल्ली के पारिस्थितिकी तंत्र में रुक रहा है, तो इसका अर्थ है कि नजफगढ़ जैसे क्षेत्र अभी भी अंतरराष्ट्रीय प्रवास मार्गों के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान कर रहे हैं।
शार्प-टेल्ड सैंडपाइपर की उपस्थिति दिल्ली के वेटलैंड्स की पारिस्थितिक अखंडता और उनके वैश्विक महत्व का एक जीवंत प्रमाण है।
प्रजाति का जीवन चक्र और खतरे
यह पक्षी उत्तरी साइबेरिया के विशाल क्षेत्रों में प्रजनन करता है और भोजन की तलाश में तटीय और अंतर्देशीय आर्द्रभूमि, मीठे पानी और खारे पानी के आवासों में घूमता है। हालांकि, यह प्रजाति गंभीर संकट का सामना कर रही है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के एक अध्ययन के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में इसकी आबादी में लगभग 45 प्रतिशत की गिरावट आई है।
मुख्य खतरों में पीली सागर (Yellow Sea) के आसपास तटीय आवासों का विनाश, औद्योगिक विकास, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के स्तर में वृद्धि शामिल है। ऑस्ट्रेलिया में सूखे और आर्द्रभूमि के कम होते क्षेत्र भी इसके अस्तित्व के लिए चुनौती बने हुए हैं।
दिल्ली: पक्षियों की वैश्विक राजधानी
हाल ही में जारी 'दिल्ली बर्ड एटलस' ने एक चौंकाने वाला तथ्य उजागर किया है। दिल्ली अपनी पक्षी विविधता के मामले में दुनिया की राष्ट्रीय राजधानियों में नैरोबी के बाद दूसरे स्थान पर है। दिल्ली के वन विभाग और WWF-India के सहयोग से तैयार इस एटलस के अनुसार, राजधानी में पक्षियों की 471 प्रजातियां पाई गई हैं।
दिल्ली की भौगोलिक स्थिति, जिसमें अरावली की पहाड़ियाँ, यमुना के मैदान और सेंट्रल एशियन फ्लाईवे (CAF) की निकटता शामिल है, इसे पक्षियों के लिए एक स्वर्ग बनाती है।
Frequently Asked Questions
1. शार्प-टेल्ड सैंडपाइपर कहाँ प्रजनन करता है?
यह पक्षी उत्तरी साइबेरिया के क्षेत्रों में प्रजनन करता है और सर्दियों के लिए ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की ओर प्रवास करता है।
2. दिल्ली में पक्षियों की कितनी प्रजातियां पाई जाती हैं?
दिल्ली बर्ड एटलस के अनुसार, राजधानी में पक्षियों की लगभग 471 प्रजातियां दर्ज की गई हैं।