पुडुचेरी की अरियाकुप्पम नदी और थेनगैतित्तू बैकवाटर्स में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक कचरे के कारण पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है। मैंग्रोव के बीच फंसा प्लास्टिक न केवल पर्यटन को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि स्थानीय मछुआरों की आजीविका पर भी प्रहार कर रहा है।

  • अरियाकुप्पम नदी और थेनगैतित्तू बैकवाटर्स में प्लास्टिक कचरे का भारी जमाव देखा गया है।
  • मैंग्रोव वनस्पतियों में फंसा प्लास्टिक पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय मछली पकड़ने के उद्योग को नुकसान पहुंचा रहा है।
  • पर्यटन और नाव चलाने वाले ऑपरेटरों को प्लास्टिक के कारण सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
  • विशेषज्ञों ने कचरे के स्रोत पर नियंत्रण और तत्काल सफाई की मांग की है।

पुडुचेरी के अरियाकुप्पम नदी और थेनगैतित्तू बैकवाटर्स में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक कचरे की बाढ़ ने एक गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर दिया है। शहर के प्रमुख नालों, विशेष रूप से उप्पर ड्रेन और मुरुंगपक्कम के दो बड़े स्टॉर्म-वाटर ड्रेन से बहकर आने वाला प्लास्टिक कचरा, इन संवेदनशील जल निकायों को चोक कर रहा है। इसमें प्लास्टिक बैग, बोतलें, खाद्य रैपर, टेट्रा पैकेट और थर्माकोल जैसी सामग्रियां शामिल हैं जो बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में बहकर आती हैं।

यह कचरा मुख्य रूप से मैंग्रोव वनस्पतियों में फंस जाता है, जिससे न केवल वहां का प्राकृतिक सौंदर्य नष्ट हो रहा है, बल्कि पूरा वेटलैंड हैबिटेट भी खतरे में है। पुडुचेरी के लिए बैकवाटर्स में नौका विहार (boating) एक प्रमुख आकर्षण है, जहां सप्ताहांत में लगभग 2,000 से 3,000 पर्यटक आते हैं। हालांकि, अब पर्यटकों को सुंदर दृश्यों के बजाय प्लास्टिक के ढेर दिखाई दे रहे हैं, जिससे इको-टूरिज्म की छवि खराब हो रही है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह समस्या केवल सौंदर्य संबंधी नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर आर्थिक और सुरक्षा जोखिम भी है। प्लास्टिक कचरा न केवल समुद्री जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों के जीवन को भी सीधे तौर पर बाधित कर रहा है।

मछुआरों के जाल में मछली से ज्यादा प्लास्टिक निकल रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।

तटीय प्रबंधन विशेषज्ञ औरोफिलियो शियाविना के अनुसार, यह कचरा स्थानीय मछुआरों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गया है। छोटे मछुआरे जब जाल डालते हैं, तो उन्हें मछली के बजाय भारी मात्रा में प्लास्टिक मिलता है, जिससे उन्हें मछली पकड़ने से ज्यादा समय जाल साफ करने में बिताना पड़ता है। इसके अलावा, नाव चलाने वाले ऑपरेटरों को भी डर है कि प्लास्टिक कचरा नाव के प्रोपेलर में फंस सकता है, जो एक बड़ी सुरक्षा समस्या है।

पर्यावरणविदों और नागरिक समाज संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पोंडीकैन (PondyCan) की सदस्य सुनाइना मंदिन ने कहा कि यह एक 'पर्यावरणीय अपराध' है और सरकार के साथ-साथ जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। वहीं, मीनावन कप्पम पीपल्स मूवमेंट के आर. सेल्वनाथन ने वाम्बकेरापलम एस्टुअरी पर तत्काल 'फ्लोटिंग बूम' या कचरा अवरोधक लगाने की मांग की है ताकि कचरे को समुद्र में जाने से रोका जा सके।

पुडुचेरी प्रदूषण नियंत्रण समिति (PPCC) का कहना है कि हालांकि उन्होंने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया है और 36 उद्योगों को सील भी किया है, लेकिन अन्य राज्यों से प्लास्टिक का अवैध प्रवाह अभी भी जारी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल सफाई से काम नहीं चलेगा; कचरे के उत्पादन और बिक्री पर कड़ाई से नियंत्रण करना होगा।

Frequently Asked Questions

1. प्लास्टिक कचरा मैंग्रोव को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
प्लास्टिक मैंग्रोव की जड़ों में फंस जाता है, जिससे पौधों का विकास रुक जाता है और वहां रहने वाले जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाता है।

2. क्या पुडुचेरी में प्लास्टिक पर प्रतिबंध है?
हाँ, पुडुचेरी में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक प्रतिबंधित है, लेकिन मल्टी-लेयर पैकेजिंग और अन्य राज्यों से आने वाले प्लास्टिक के कारण समस्या बनी हुई है।

Did You Know?: मैंग्रोव वन 'तटीय रक्षक' कहलाते हैं, जो समुद्री लहरों और सुनामी के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं।