नीलगिरी क्षेत्र में गिद्धों के संरक्षण के लिए जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं को जोड़ने के लिए खेल और शिक्षा का सहारा लिया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पशुओं में हानिकारक दवाओं के उपयोग को रोकना और 'गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र' बनाना है।

  • नीलगिरी में 1 से 6 सितंबर तक अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता सप्ताह मनाया गया।
  • पशुपालकों को डिक्लोफेनाक जैसी हानिकारक दवाओं के बजाय हर्बल किट वितरित किए गए।
  • क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर 'गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र' घोषित करने के लिए ऊतक नमूने एकत्र किए जा रहे हैं।

तमिलनाडु के नीलगिरी और आसपास के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस (5 सितंबर) के अवसर पर एक व्यापक जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया। 1 से 6 सितंबर तक चले इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना और उनके घटते अस्तित्व के प्रति समाज को सचेत करना था।

इस अभियान का नेतृत्व संरक्षण एनजीओ अरुलागम (Arulagam) ने किया, जिसे सरकारी कला महाविद्यालय, ऊटी के वन्यजीव जीवविज्ञान विभाग और 'स्टेट स्ट्रीट' के स्वयंसेवकों का भरपूर सहयोग मिला। युवाओं में जागरूकता पैदा करने के लिए कॉलेज छात्रों के बीच क्विज़, भाषण और पेंटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से उन्हें गिद्ध संरक्षण की शपथ दिलाई गई।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, गिद्ध प्रकृति के 'सफाईकर्मी' होते हैं। यदि गिद्ध विलुप्त होते हैं, तो मृत पशुओं के शव सड़ने लगते हैं, जिससे रेबीज और एंथ्रेक्स जैसी घातक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नीलगिरी जैसे जैव-विविधता वाले क्षेत्र में गिद्धों का संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाना नहीं, बल्कि पूरे सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

जागरूकता बढ़ाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया गया। मुदुमलई टाइगर रिजर्व (MTR) के अनाइकटि गांव में 'गिद्ध ट्रॉफी' वॉलीबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। इस खेल प्रतियोगिता का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं और पशुपालकों को यह समझाना था कि प्राकृतिक रूप से मृत पशुओं के शव गिद्धों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत हैं और उन्हें सुरक्षित रखना आवश्यक है।

गिद्धों का संरक्षण केवल वैज्ञानिक प्रयास नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी और पशुपालन पद्धतियों में बदलाव का परिणाम होना चाहिए।

एक बड़ी चुनौती पशुओं के इलाज में उपयोग होने वाली डिक्लोफेनाक (Diclofenac) जैसी गैर-स्टेरायडल सूजनरोधी दवाओं (NSAIDs) का उपयोग है, जो गिद्धों के लिए घातक साबित होती हैं। इसे रोकने के लिए, पद्म श्री डॉ. पुन्नियमूर्ति के पारंपरिक ज्ञान पर आधारित 'योर फार्म' द्वारा विकसित हर्बल एथ्नो-वेटेरिनरी मेडिसिन (EVM) किट पशुपालकों को मुफ्त वितरित किए गए।

क्षेत्र को आधिकारिक 'गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र' (Vulture Safe Zone) घोषित करने की दिशा में वन विभाग के मार्गदर्शन में पशु ऊतक नमूनों का संग्रह किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए, अरुलागम द्वारा IPAN ट्रस्ट को एक डीप फ्रीजर प्रदान किया गया, जिसे ट्रस्टी नाइजेल ओटर ने स्वीकार किया।

क्या आप जानते हैं?: गिद्धों की पाचन प्रणाली इतनी शक्तिशाली होती है कि वे उन बैक्टीरिया और वायरस को नष्ट कर सकते हैं जो अन्य जानवरों के लिए जानलेवा होते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: डिक्लोफेनाक दवा गिद्धों के लिए क्यों खतरनाक है?
उत्तर: यह दवा गिद्धों के गुर्दों (Kidneys) को विफल कर देती है, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है।

प्रश्न 2: 'गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र' क्या होता है?
उत्तर: यह वह क्षेत्र होता है जहाँ गिद्धों के लिए घातक दवाओं का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित होता है और उनके भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।