विशाखापट्टनम जिले में वर्षा की भारी कमी और अत्यधिक दोहन के कारण भूजल स्तर में चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है। कई गांवों में पानी का स्तर 20 मीटर से भी नीचे चला गया है, जिससे भविष्य में जल संकट गहराने की आशंका है।

  • विशाखापट्टनम का भूजल स्तर अगस्त 2025 के 7.65 मीटर से गिरकर अगस्त 2026 में 11.51 मीटर हो गया है।
  • जिले में वर्षा में 47.89% की भारी कमी दर्ज की गई है।
  • 6 गांवों में जल स्तर 20 मीटर से अधिक गहरा हो गया है, जबकि 135 बस्तियां गंभीर दायरे में हैं।
  • शहरी कंक्रीट कवर और बोरवेल का अत्यधिक उपयोग मुख्य कारण हैं।

विशाखापट्टनम जिले के जल स्तर में पिछले एक साल में 3.86 मीटर की भारी गिरावट आई है। जिला भूजल और जल ऑडिट विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में जो वाटर टेबल जमीन से 7.65 मीटर नीचे था, वह अगस्त 2026 तक गिरकर 11.51 मीटर तक पहुँच गया है। जिला भूजल अधिकारी के. पुष्पलता ने इस गिरावट को सीधे तौर पर वर्षा की भारी कमी और अनियंत्रित दोहन से जोड़ा है।

एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान यह खुलासा हुआ कि जिले में वर्षा का स्तर सामान्य 177.3 मिमी के मुकाबले केवल 92.39 मिमी रहा, जो कि 47.89% की कमी को दर्शाता है। इसके अलावा, सिंचाई, घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए बोरवेल के माध्यम से पानी का अत्यधिक निष्कर्षण इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि विशाखापट्टनम का तेजी से होता शहरीकरण एक 'कंक्रीट जंगल' बना रहा है, जो बारिश के पानी को जमीन के अंदर रिसने से रोकता है। जब प्राकृतिक पुनर्भरण (recharge) रुक जाता है और निष्कर्षण बढ़ता है, तो जल स्तर का गिरना अनिवार्य हो जाता है। यह न केवल कृषि को प्रभावित करेगा, बल्कि तटीय क्षेत्रों में समुद्री पानी के प्रवेश (seawater intrusion) के खतरे को भी बढ़ाएगा, जिससे बचा हुआ भूजल भी खारा हो सकता है।

"एल नीनो (El Niño) के प्रभाव ने मानसून को बाधित किया है, जिससे न केवल बारिश कम हुई है बल्कि विशाखापट्टनम के कई हिस्सों में भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।" - पी. किरण कुमार, CGWB वैज्ञानिक।

निगरानी नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार, 31 पिज़ोमीटर और आठ अवलोकन कुओं से प्राप्त डेटा चौंकाने वाला है। 6 गांवों में भूजल स्तर 20 मीटर से अधिक गहरा हो गया है, जबकि 38 गांवों में यह 3 से 6 मीटर के बीच है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 135 बस्तियां, जिनमें 96 ग्रामीण गांव और 39 शहरी वार्ड शामिल हैं, 6 से 20 मीटर की गहराई के दायरे में आ गई हैं।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि रेनवाटर हार्वेस्टिंग और ग्रे-वाटर ट्रीटमेंट जैसी तकनीकों को तुरंत नहीं अपनाया गया, तो शहर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। विशेष रूप से येनडाडा-मधुरवाडा कॉरिडोर जैसे क्षेत्रों में, जहाँ ऊंची इमारतें तेजी से खड़ी हो रही हैं, भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।

पैरामीटर अगस्त 2025 अगस्त 2026
औसत भूजल स्तर 7.65 मीटर 11.51 मीटर
वर्षा की स्थिति सामान्य के करीब 47.89% की कमी
क्या आप जानते हैं?: कंक्रीट की सड़कें और पक्के फर्श 'अभेद्य सतह' (impermeable surfaces) बनाते हैं, जिससे बारिश का पानी जमीन में जाने के बजाय नालियों में बह जाता है, जिसे 'सरफेस रनऑफ' कहा जाता है।

Frequently Asked Questions

1. विशाखापट्टनम में भूजल स्तर गिरने का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारणों में 47.89% वर्षा की कमी, बोरवेल द्वारा अत्यधिक पानी निकालना और शहरी कंक्रीट कवर के कारण प्राकृतिक पुनर्भरण में बाधा शामिल है।

2. तटीय क्षेत्रों के लिए इसका क्या खतरा है?
जब मीठे पानी का स्तर गिरता है, तो समुद्र का खारा पानी जमीन के अंदर प्रवेश कर सकता है, जिससे पीने का पानी अनुपयोगी हो जाता है।