गूगल ने भारत के तीन राज्यों में चावल की खेती से मीथेन उत्सर्जन कम करने के लिए स्टार्टअप मिट्टी लैब्स के साथ चार साल का ऐतिहासिक समझौता किया है।
- गूगल 2030 तक मिट्टी लैब्स से 1 मिलियन कार्बन क्रेडिट खरीदेगा।
- यह परियोजना कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 1 लाख हेक्टेयर खेतों को कवर करेगी।
- मीथेन उत्सर्जन में 50% और पानी के उपयोग में 40% की कमी लाने का लक्ष्य।
- निगरानी के लिए GeoAI और सैटेलाइट रडार इमेजरी का उपयोग किया जाएगा।
पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए गूगल ने भारतीय क्लाइमेट-टेक स्टार्टअप मिट्टी लैब्स (Mitti Labs) के साथ एक विशाल समझौता किया है। यह चावल की खेती से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक रूप से घोषित सौदा है।
चार साल के इस समझौते के तहत कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के चावल उत्पादक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। मिट्टी लैब्स के सह-संस्थापक जेवियर लगुअर्टा के अनुसार, यह परियोजना अपने चरम स्तर पर लगभग 1,00,000 हेक्टेयर भूमि तक पहुंचेगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है जिससे खेतों में पानी भरने की अवधि कम हो, जिससे मीथेन गैस का उत्सर्जन कम हो सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि गूगल के लिए यह सौदा उसकी 'नेट-जीरो 2030' लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक अनिवार्य कदम है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश के कारण गूगल का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 2025 में 18% बढ़कर 14.5 मिलियन मीट्रिक टन हो गया है। ऐसे में, कृषि-आधारित कार्बन क्रेडिट्स उसके उत्सर्जन को संतुलित करने का एक प्रभावी तरीका हैं।
"GeoAI और सैटेलाइट रडार का मेल कार्बन क्रेडिट्स को केवल एक अनुमान से बदलकर एक सत्यापन योग्य जलवायु संपत्ति बना देता है।"
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता GeoAI प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म सैटेलाइट रडार इमेजरी (जिसकी रिज़ॉल्यूशन 50 सेंटीमीटर तक है) और जमीनी स्तर के माप का उपयोग करता है। इससे छोटे खेतों में फसल की वृद्धि, मिट्टी की नमी और जलभराव की दूरस्थ निगरानी संभव हो पाती है, जिससे गोल्ड स्टैंडर्ड और आइसोमेट्रिक जैसे निकायों से प्रमाणन प्राप्त करना आसान हो जाता है।
आर्थिक दृष्टि से, इस सौदे का सबसे अधिक लाभ किसान समुदायों को मिलेगा। मिट्टी लैब्स का दावा है कि परियोजना से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा सीधे किसानों को दिया जाएगा, जिससे उन्हें जलवायु-अनुकूल खेती अपनाने का वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा।
भारत में गूगल का यह पहला प्रयास नहीं है। इससे पहले कंपनी ने बायोचार के लिए वरहा (Varaha) और राजस्थान में सौर ऊर्जा के लिए ReNew के साथ साझेदारी की है। यह स्पष्ट करता है कि गूगल अपनी वैश्विक स्थिरता रणनीति के लिए भारत को एक प्रमुख केंद्र मान रहा है।
| मानक | पारंपरिक चावल की खेती | मिट्टी लैब्स पद्धति |
|---|---|---|
| मीथेन उत्सर्जन | उच्च (लगातार जलभराव) | ~50% की कमी |
| पानी का उपयोग | अत्यधिक सिंचाई | ~40% की कमी |
| निगरानी | मैनुअल/अनुमानित | GeoAI और सैटेलाइट रडार |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: चावल के खेतों में पानी कम करने से मीथेन कैसे कम होती है?
जब खेतों को पूरी तरह जलमग्न रखा जाता है, तो ऑक्सीजन की कमी के कारण मीथेन पैदा करने वाले बैक्टीरिया सक्रिय होते हैं। बारी-बारी से सुखाने और भिगोने (AWD) से मिट्टी में ऑक्सीजन पहुँचती है, जिससे मीथेन का उत्पादन रुक जाता है।
प्रश्न 2: इस परियोजना में GeoAI की क्या भूमिका है?
GeoAI कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भौगोलिक डेटा का संयोजन है, जिसकी मदद से मिट्टी लैब्स हजारों छोटे खेतों की निगरानी बिना वहां जाए, सीधे सैटेलाइट के जरिए कर सकता है।