शिवमोग्गा में राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के अवसर पर अधिकारी और जनता ने शहीदों को सम्मानित किया, तीन गोलियों की सलामी और फूलों की चढ़ावा के साथ। वन संरक्षण के महत्व पर उच्च पदस्थ अधिकारियों ने विशेष जोर दिया।
- शिवमोग्गा में तीन गोलियों की सलामी और फूलों की चढ़ावा से शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
- मुख्य न्यायाधीश जी.ए. मंजुनाथ ने वन कर्मियों की कठिन परिस्थितियों को उजागर किया।
- मुख्य वन संरक्षक के.टी. हनुमन्थप्पा ने पर्यावरण संरक्षण के भविष्य के प्रभावों पर प्रकाश डाला।
समारोह का विवरण
शिवमोग्गा में राष्ट्रीय वन शहीद दिवस को स्मरण करने के लिये एक भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जी.ए. मंजुनाथ ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने कहा कि वन में काम करना साधारण नहीं है और समाज को वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए।
समारोह में शहीदों के नाम प्रसन्न कृष्ण पाटगर, डीसीएफ (वन्यजीव) ने पढ़े और तीन गोलियों की सलामी तथा फूलों की चढ़ावा से सम्मान अर्पित किया गया। उपस्थित प्रमुखों में मुख्य वन संरक्षक के.टी. हनुमन्थप्पा, वन संरक्षक के. गणपति, उप-कमीशनर प्रभुलिंग कावलिकट्टी, पुलिस अधीक्षक बी. निकिल और ज़िला पंचायत के सीईओ एन. हेमंथ शामिल थे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में वन शहीद दिवस प्रत्येक वर्ष 21 जुलाई को मनाया जाता है, जो 1997 में स्थापित हुआ था। यह दिन उन सभी वन कर्मचारियों को समर्पित है जिन्होंने कर्तव्यनिष्ठा से कार्य करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। पिछले दशकों में कर्नाटक राज्य ने कई वन संरक्षण पहलों को लागू किया है, परन्तु वन्यजीवों और वन्य क्षेत्रों में अपराधों में वृद्धि ने कर्मचारियों की सुरक्षा को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that honoring forest martyrs not only preserves their legacy but also galvanizes public support for stricter anti‑poaching laws and sustainable forest management, crucial for India’s climate goals.
"वन कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही भारत की जैव विविधता की रक्षा का पहला कदम है," कहते हैं पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह।
Frequently Asked Questions
वन शहीद दिवस कब मनाया जाता है? यह हर वर्ष 21 जुलाई को राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है।
शिवमोग्गा में इस अवसर पर कौन-कौन उपस्थित रहे? प्रमुख वन अधिकारी, न्यायाधीश, पुलिस अधिकारी और स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।