न्यू यॉर्क के एक फेडरल जज ने गौतम अडानी और उनके परिवार के खिलाफ अमेरिकी भ्रष्टाचार आरोपों को खारिज कर दिया। यह निर्णय DOJ की सार्वजनिक हित में न होने की दलील और प्रक्रिया में irregularities के कारण आया।
मुख्य बिंदु
- अडानी के खिलाफ अमेरिकी आपराधिक आरोप खारिज हुए
- लगभग $265 मिलियन के भ्रष्टाचार का आरोप था
- DOJ ने सार्वजनिक हित की कमी और साक्ष्य कठिनाइयों का हवाला दिया
केस का संक्षिप्त विवरण
न्यू यॉर्क स्थित फेडरल जज निकोलस गारौफ़िस ने 11 अगस्त 2026 को गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और छह अन्य पर लगे आपराधिक आरोपों को समाप्त कर दिया। यह मामला नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब अडानी समूह पर भारतीय सरकारी अधिकारियों को $265 मिलियन तक के रिश्वत देने का आरोप लगाया गया था।
भ्रष्टाचार आरोपों की मुख्य बातें
अमेरिकी अभियोजकों ने कहा कि अडानी ग्रीन एनर्जी और Azure Power ने भारतीय सौर ऊर्जा टेंडर में भाग लेते हुए, राज्य विद्युत वितरण कंपनियों (डिसकॉम) को अनुबंध दिलाने के लिए बड़े पैमाने पर रिश्वत दी। आरोप है कि 2020‑2024 के बीच $250 मिलियन से अधिक रिश्वत का भुगतान या प्रस्ताव किया गया।
अंध्र प्रदेश का जुड़ाव
अंध्र प्रदेश राज्य ने उन सौर परियोजनाओं का सबसे बड़ा खरीदार होने का दावा किया, जहाँ लगभग 85% रिश्वत का भुगतान एक उच्च‑रैंकिंग अधिकारी को किया गया था। अडानी ने 2021 में इस अधिकारी और मुख्यमंत्री Y.S. जगर मोहन रेड्डी से कई बार मुलाकात की, जैसा कि अमेरिकी फाइलिंग्स में बताया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अडानी समूह ने 2010 के दशक में ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में तेज़ी से विस्तार किया। पिछले वर्षों में, समूह को कई अंतरराष्ट्रीय नियामकों द्वारा जांच का सामना करना पड़ा, जिसमें 2023 में यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताएँ शामिल थीं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the dismissal signals a shift in U.S. enforcement priorities, emphasizing strategic economic ties over prosecutorial zeal in high‑profile foreign cases.
"अडानी का केस दिखाता है कि वैश्विक व्यापार में कानूनी जोखिम कैसे राजनीति और आर्थिक हितों के बीच बदलते हैं," कहते हैं श्वेतपत्र विशेषज्ञ डॉ. रवीश कुमार।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या अडानी समूह अब भी अमेरिकी निवेशकों से फंड जुटा सकता है?
उत्तर: वर्तमान में, DOJ ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहना पड़ेगा।
प्रश्न 2: क्या यह निर्णय अडानी की भारतीय शाखा को प्रभावित करेगा?
उत्तर: भारतीय कानूनी प्रक्रिया अलग है, इसलिए इस अमेरिकी फैसले का सीधे प्रभाव नहीं होगा।