साल 2026 में 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जानें दोनों व्रतों की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा का सही क्रम।
- 14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ मनाई जाएगी।
- हरतालिका तीज की पूजा सुबह 6:05 से 7:06 के बीच करना शुभ है।
- गणेश चतुर्थी के लिए मध्याह्न काल (सुबह 11:02 से दोपहर 1:31) सबसे उत्तम है।
- दोनों व्रतों की पूजा के लिए सुबह शिव-पार्वती और दोपहर में गणेश जी की स्थापना करें।
वर्ष 2026 का पंचांग एक अत्यंत दुर्लभ और आध्यात्मिक संयोग की ओर संकेत कर रहा है। आगामी 14 सितंबर 2026 को हिंदू धर्म के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व—हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी—एक ही दिन पड़ रहे हैं। यह संयोग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भक्तों के लिए दोहरी कृपा प्राप्त करने का अवसर भी है।
पंचांग और तिथियों का गणित
पंचांग गणना के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026 को सुबह 7:08 बजे से प्रारंभ होकर 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियमों का पालन करते हुए, 14 सितंबर को ही हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा। वहीं, चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और अगले दिन तक प्रभावी रहेगी। चूंकि गणेश चतुर्थी का मुख्य पूजन मध्याह्न काल में होता है, इसलिए यह पर्व भी 14 सितंबर को ही मनाया जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि
हरतालिका तीज के लिए सुबह का समय अत्यंत फलदायी है। पंचांग के अनुसार, पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा। इस समय महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाओं का पूजन कर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
दूसरी ओर, गणेश चतुर्थी के लिए मध्याह्न काल का विशेष महत्व है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार, भगवान गणेश की स्थापना और पूजा का शुभ समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि इस तरह के दुर्लभ संयोगों का प्रभाव समाज के आध्यात्मिक ताने-बाने पर गहरा पड़ता है। जब दो बड़े त्योहार एक साथ आते हैं, तो यह न केवल धार्मिक उत्साह को बढ़ाता है, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को भी तीव्र करता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब शिव-शक्ति और विघ्नहर्ता गणेश का संयोग होता है, तो यह परिवार में सुख, समृद्धि और बाधाओं के नाश का प्रतीक माना जाता है।
दोनों व्रत एक साथ कैसे करें?
यदि कोई श्रद्धालु दोनों व्रत रखना चाहता है, तो उन्हें क्रम का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले सुबह हरतालिका तीज की निर्जला पूजा संपन्न करें। इसके पश्चात, दोपहर के समय गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर चतुर्थी का पूजन करें। कुछ परंपराओं में तीज की सामग्री के विसर्जन के बाद ही गणेश स्थापना की सलाह दी जाती है।
Frequently Asked Questions
1. क्या हरतालिका तीज का व्रत और गणेश चतुर्थी का व्रत एक साथ रखना अनिवार्य है?
नहीं, यह पूरी तरह से आपकी व्यक्तिगत श्रद्धा, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।
2. हरतालिका तीज का पारण कब करना चाहिए?
निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं अगले दिन सूर्योदय के पश्चात अपनी परंपरा के अनुसार पारण कर सकती हैं।