बिहार के 15 जिलों में भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ ने तबाही मचा दी है, जिससे लगभग 49 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। गंगा और कोसी जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं।

  • बिहार के 15 जिलों में लगभग 49.36 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
  • गंगा, कोसी और गंडक जैसी नदियां खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं।
  • SDRF और NDRF की कुल 37 टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं।
  • सितंबर में अब तक सामान्य से 13% अधिक बारिश दर्ज की गई है।

बिहार में मानसून की भारी बारिश ने एक बार फिर भीषण संकट पैदा कर दिया है। सोमवार, 14 सितंबर 2026 को राज्य के 15 जिलों में बाढ़ ने कहर बरपाया, जिससे लगभग 49.36 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। नेपाल से आने वाली नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश और राज्य के भीतर हुई भारी वर्षा के कारण कई प्रमुख नदियां और जलधाराएं अपने खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं।

प्रमुख नदियों की स्थिति और जलस्तर

राज्य के मौसम विभाग के अनुसार, सितंबर महीने में अब तक 111.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग 13% अधिक है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गंगा नदी भागलपुर के सुल्तानगंज में खतरे के निशान से 1.71 मीटर ऊपर बह रही है। इसके अलावा, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा जैसी नदियां भी अपने निर्धारित स्तर से ऊपर बह रही हैं, जिससे तटीय इलाकों में पानी घुसने का खतरा बढ़ गया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि बिहार में हर साल आने वाली यह बाढ़ न केवल जान-माल का नुकसान करती है, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी तहस-नहस कर देती है। नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि और नेपाल से आने वाले पानी का अनियंत्रित प्रवाह बुनियादी ढांचे और खाद्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।

नदियों का बढ़ता जलस्तर और नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी बिहार के मैदानी इलाकों के लिए एक वार्षिक आपदा बन चुका है जिसे तत्काल प्रबंधन की आवश्यकता है।

प्रशासन ने राहत कार्यों के लिए मोर्चा संभाल लिया है। वर्तमान में 1,260 सामुदायिक रसोई और 13 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ लगभग 11,060 लोगों के लिए भोजन, आवास और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की गई है। आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि SDRF की 27 टीमें और NDRF की 10 टीमें प्रभावित जिलों में बचाव कार्यों में तैनात हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बिहार का इतिहास बाढ़ की त्रासदी से भरा रहा है। कोसी नदी, जिसे अक्सर 'बिहार का शोक' कहा जाता है, अपने मार्ग बदलने और अचानक जलस्तर बढ़ने के लिए कुख्यात है। हर साल मानसून के दौरान, उत्तर बिहार के जिले जलमग्न हो जाते हैं, जिससे विस्थापन और आर्थिक संकट की स्थिति पैदा होती है।

नदी का नामस्थिति
गंगा (सुल्तानगंज)खतरे के निशान से 1.71 मीटर ऊपर
कोसीखतरे के निशान से ऊपर (बलतरा और कुरसेला)
गंडक (वाल्मीकि नगर)बढ़ता हुआ डिस्चार्ज (90,600 क्यूसेक)
बागमतीखतरे के निशान से ऊपर
Did You Know?: कोसी नदी अपने मार्ग को बदलने के लिए जानी जाती है, जिससे दशकों में कई बार बस्तियां पूरी तरह डूब चुकी हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: बिहार के कौन से जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं?
उत्तर: पटना, भागलपुर, सारण, वैशाली, बेगूसराय, मुंगेर, कटिहार और अररिया सहित कुल 15 जिले प्रभावित हैं।

प्रश्न 2: राहत कार्यों के लिए कौन सी टीमें तैनात हैं?
उत्तर: बचाव कार्य के लिए NDRF की 10 टीमें और SDRF की 27 टीमें तैनात की गई हैं।