रियो गेम्स ने 'League of Legends Classic' का अनावरण किया है, लेकिन पुराने चैंपियन स्किन्स के लिए पैसे वसूलने के फैसले ने प्रशंसकों को नाराज कर दिया है। क्या यह गेमिंग इतिहास के साथ न्याय है?

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • League of Legends Classic का वैश्विक लॉन्च 29 जुलाई को निर्धारित है।
  • खिलाड़ियों को पुराने 'क्लासिक' लुक वाले चैंपियंस के लिए अलग से भुगतान करना होगा।
  • प्रशंसकों ने इसे 'Paywall' बताते हुए रियो गेम्स की नीतियों की आलोचना की है।
  • गेम में पुराने मैप और एबिलिटीज को वापस लाया गया है, लेकिन मॉडर्न वॉयस लाइन्स और एनिमेशन का मिश्रण है।

गेमिंग जगत में हलचल तब मच गई जब Riot Games ने अपने बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट, League of Legends Classic का आधिकारिक खुलासा किया। यह नया गेम मोड उन पुराने खिलाड़ियों के लिए एक नॉस्टैल्जिक यात्रा की तरह है जो गेम के शुरुआती सीज़न के रोमांच को फिर से जीना चाहते हैं। हालांकि, जैसे-जैसे विवरण सामने आ रहे हैं, समुदाय के बीच उत्साह की जगह भारी नाराजगी देखी जा रही है।

स्किन्स के लिए शुल्क: विवाद की जड़

विवाद का मुख्य कारण चैंपियंस का 'क्लासिक लुक' है। रियो गेम्स ने घोषणा की है कि हालांकि कुछ फ्री रिवॉर्ड्स मिलेंगे, लेकिन अधिकांश चैंपियंस के मूल (default) स्वरूप को अनलॉक करने के लिए खिलाड़ियों को 500 Riot Points (लगभग $5) खर्च करने होंगे। प्रशंसकों का तर्क है कि ये 'स्किन्स' नहीं हैं, बल्कि वे मूल मॉडल हैं जो कभी गेम का डिफ़ॉल्ट हिस्सा हुआ करते थे। Reddit पर उपयोगकर्ताओं ने इसकी तुलना World of Warcraft Classic से करते हुए कहा कि रियो गेम्स यहाँ अत्यधिक लालची व्यवहार कर रहा है।

पुराने और नए का अजीब मिश्रण

केवल आर्थिक मॉडल ही समस्या नहीं है; गेम की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। PBE (Public Beta Environment) में खेलने वाले खिलाड़ियों ने पाया है कि गेम 'Uncanny Valley' में फंस गया है। जहाँ एक ओर पुराना 'Summoner's Rift' मैप और पुरानी एबिलिटीज मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर चैंपियंस की वॉयस लाइन्स और कुछ एनिमेशन (जैसे Ryze का ऑटो-अटैक) आधुनिक संस्करण के हैं। यह मिश्रण उस शुद्ध 'क्लासिक' अनुभव को बाधित करता है जिसे खिलाड़ी तलाश रहे हैं।

क्या यह एक स्थायी बदलाव है?

अच्छी खबर यह है कि League of Legends Classic कोई अल्पकालिक इवेंट नहीं लग रहा है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक मोड होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने फाइलों को आधुनिक इंजन के साथ तालमेल बिठाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है, जिससे एनिमेशन और VFX में विसंगतियां आ रही हैं। अब देखना यह होगा कि क्या रियो गेम्स प्रशंसकों के विरोध के बाद अपने माइक्रो-ट्रांजैक्शन मॉडल में कोई बदलाव करता है या नहीं।