कॉर्पोरेट सम्मेलनों से लेकर राज्य विधानसभाओं तक, 'मैनेल' (केवल पुरुषों वाले पैनल) का प्रभुत्व बना हुआ है। यह लेख वित्तीय समावेशन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं की अनुपस्थिति की गहरी जांच करता है।
- कॉर्पोरेट शिखर सम्मेलनों में 'मैनेल' (केवल पुरुष पैनल) का चलन अभी भी जारी है।
- राजनीतिक स्तर पर, कर्नाटक और केंद्र सरकार दोनों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व चिंताजनक रूप से कम है।
- वित्तीय समावेशन की नीतियों का लाभ महिलाओं को मिलता है, लेकिन नीतिगत चर्चाओं में उनकी आवाज गायब है।
हाल ही में दिल्ली में आयोजित होने वाले एक फिनटेक शिखर सम्मेलन के आयोजकों ने 'वित्तीय समावेशन 2.0' (Financial Inclusion 2.0) शीर्षक के तहत एक पोस्टर जारी किया। विडंबना यह है कि इस पैनल के सभी आठ वक्ता पुरुष थे। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे वित्तीय समावेशन की बात करने वाले मंचों पर उन महिलाओं की अनुपस्थिति है, जो वास्तव में इन योजनाओं की मुख्य लाभार्थी हैं।
पंडितों और विशेषज्ञों के बीच 'मैनेल' (Manel) शब्द का प्रयोग उन समूहों के लिए किया जाता है जहाँ केवल पुरुष शामिल होते हैं। चाहे वह वैज्ञानिक उपलब्धियाँ हों, भू-राजनीतिक संकट हों या कला, पुरुषों का वर्चस्व बना हुआ है। अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने भी एक बार वैश्विक नेताओं की बैठक में महिलाओं की कमी पर तीखी टिप्पणी की थी, जिसे उन्होंने 'योग्यतावाद का अंत' करार दिया था।
यह क्यों मायने रखता है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, जब निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं और चर्चा के मंचों से महिलाओं को बाहर रखा जाता है, तो नीतियां एकतरफा हो जाती हैं। महिलाओं की भागीदारी केवल संख्यात्मक नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण निर्णय लेने के लिए आवश्यक है।
'मैनेल' केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था का प्रतीक है जो अनजाने में या जानबूझकर महिलाओं की विशेषज्ञता को दरकिनार करती है।
राजनीति में भी यही स्थिति है। कर्नाटक की विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कैबिनेट में एक भी महिला का न होना चर्चा का विषय बना। हालांकि कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रतिनिधित्व की कमी स्पष्ट है। इसी तरह, केंद्र सरकार के 72 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में केवल सात महिला सदस्य हैं, जो लैंगिक समानता के दावों पर सवाल उठाते हैं।
वैश्विक स्तर पर भी यह समस्या बनी हुई है। अफगानिस्तान जैसे देशों में तो स्थिति और भी भयावह है, जहाँ महिलाओं को घर से बाहर निकलने के लिए पुरुषों की अनुमति की आवश्यकता होती है।
Frequently Asked Questions
1. 'मैनेल' (Manel) क्या है?
यह 'Male Panel' का संक्षिप्त रूप है, जिसका उपयोग ऐसे समूहों के लिए किया जाता है जहाँ चर्चा के लिए केवल पुरुषों को आमंत्रित किया जाता है।
2. वित्तीय समावेशन में महिलाओं की भूमिका क्या है?
महिलाएं सरकारी योजनाओं जैसे जन धन योजना की मुख्य लाभार्थी हैं, लेकिन नीतिगत चर्चाओं में उनकी भागीदारी बहुत कम है।