केन‑बेतवा परियोजना विरोध में 18‑दिन तक भूख हड़ताल कर रहे अमित भटनागर ने अपनी माँ के अनुरोध पर उपवास समाप्त किया। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों की नई जाँच का वादा किया।
मुख्य बिंदु
- अमित भटनागर ने माँ के आग्रह पर 18‑दिन का उपवास समाप्त किया।
- राज्य प्रशासन ने विस्थापित परिवारों की नई सत्यापन प्रक्रिया को मंजूरी दी।
- केन‑बेतवा लिंक प्रोजेक्ट का लक्ष्य 1 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को सिंचित करना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
केन‑बेतवा नदी लिंक परियोजना, भारत की राष्ट्रीय दृष्टिकोण योजना के तहत पहला नदी अंतर‑जुड़ाव कार्य है, जिसे 2014 में स्वीकृति मिली थी। इसका उद्देश्य बंडेलखंड के जल‑संकटग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई, पीने का पानी और जलविद्युत प्रदान करना है।
अमित भटनागर, जो चातरपुर (छ.प्र.) के बीजावर के निवासी हैं, 3 जुलाई से बाराना नदी पर एक अस्थायी पुल के नीचे विरोध को लेकर 18‑दिन तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे थे। उन्होंने केन‑बेतवा लिंक प्रोजेक्ट और अन्य सिंचाई योजनाओं में पुनर्वास एवं मुआवजा संबंधी धांधली की शिकायतें उठाई थीं।
19 जुलाई को बरसात के कारण बढ़ते जल स्तर को लेकर पुलिस ने विरोध को बिखेर दिया, परंतु भटनागर ने अपने हड़ताल को जारी रखने का इरादा जताया। अंततः 24 जुलाई को, जब उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया, तो उनके घर वापस लौटने पर उनकी माँ ने उन्हें उपवास समाप्त करने के लिए प्रेरित किया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस तरह के स्थानीय आंदोलन अक्सर नीति‑निर्माताओं को पारदर्शी पुनर्वास प्रक्रियाओं की ओर धकेलते हैं, जिससे भविष्य में समान परियोजनाओं में सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।
"यह विरोध पुनर्वास नीतियों में मौजूदा खामियों को उजागर करता है," कहते हैं डॉ. रवीन्द्र शर्मा, वरिष्ठ नीति विश्लेषक।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- प्रदर्शकों की मुख्य माँगें क्या थीं?
- नई सत्यापन प्रक्रिया के बाद अगले कदम क्या होंगे?