1802 में एक फ्रेंच खोजकर्ता ने कंगारू द्वीप पर सूअर छोड़ दिए थे। दो सदी से अधिक संघर्ष के बाद, ऑस्ट्रेलिया ने अब इस आक्रमणकारी प्रजाति को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
मुख्य बिंदु
- 1802 में फ्रेंच अन्वेषक ने द्वीप पर सूअर छोड़े
- सूअर ने स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुँचाया
- 2026 में व्यापक उन्मूलन अभियान सफल रहा
1802 में फ्रांसीसी अन्वेषक एडवर्ड डेमार्टिन ने कंगारू द्वीप पर 20 से अधिक सूअर छोड़ दिए। उनका उद्देश्य द्वीप के रहने वालों को भोजन उपलब्ध कराना था, लेकिन यह कदम पर्यावरणीय आपदा का कारण बना।
सालों तक, ये सूअर स्थानीय वन्यजीवों की प्रजातियों, विशेषकर अंतर्निहित वनस्पति और छोटे स्तनधारियों को नुकसान पहुंचाते रहे। द्वीप के पारिस्थितिकी तंत्र पर उनके प्रभाव को लेकर कई वैज्ञानिक अध्ययन हुए, जिनमें से कई ने उन्मूलन की आवश्यकता पर बल दिया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कंगारू द्वीप, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के निकट स्थित, 19वीं सदी में कई यूरोपीय अन्वेषकों का ठिकाना था। इन अन्वेषकों द्वारा लाए गए विदेशी जानवरों ने अक्सर द्वीप की जैव विविधता को बाधित किया, जैसे कि 1802 में डेमार्टिन द्वारा छोड़े गए सूअर।
2024 में शुरू हुए बड़े पैमाने के उन्मूलन कार्यक्रम में ट्रैपिंग, शिकार और जीनोमिक तकनीक का उपयोग किया गया। 2026 में, अधिकारी घोषणा करते हैं कि सभी ज्ञात सूअर समाप्त कर दिए गए हैं, जिससे द्वीप की प्राकृतिक पुनर्स्थापना की राह खुली।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस तरह की सफल उन्मूलन पहलें विश्वभर में आक्रमणकारी प्रजातियों के प्रबंधन के लिए मॉडल बन सकती हैं, जिससे जैव विविधता संरक्षण को मजबूती मिलती है।
"कंगारू द्वीप की सफलता दर्शाती है कि दृढ़ नीतियों और वैज्ञानिक समर्थन के साथ आक्रमणकारी प्रजातियों को पूरी तरह हटाया जा सकता है," कहते हैं पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. अंजु पाटिल।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या सभी सूअर वास्तव में समाप्त हो गए हैं?
उत्तर: हाँ, अभी तक कोई जीवित सूअर नहीं पाया गया है और निरंतर निगरानी जारी है।
प्रश्न 2: यह प्रक्रिया कितनी लागत पर पूरी हुई?
उत्तर: ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस अभियान के लिए लगभग 150 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर खर्च किए हैं।