भारत में हेपेटाइटिस बी और सी के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए विशेषज्ञों ने समय पर स्क्रीनिंग और व्यापक टीकाकरण की मांग की है। सरकार के 2030 लक्ष्य को पूरा करने हेतु तत्काल कदम आवश्यक हैं।
मुख्य बिंदु
- हेपेटाइटिस बी और सी का बढ़ता खतरा
- समय पर स्क्रीनिंग से बचाव संभव
- सरकार को 2030 लक्ष्य के लिए तेज़ कदम उठाने चाहिए
इतिहासिक पृष्ठभूमि
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2030 तक हेपेटाइटिस को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत में लगभग 1.2 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी से और 6 लाख लोग हेपेटाइटिस सी से ग्रसित हैं, जिससे यह रोग सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
पिछले दशकों में भारत ने टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किए, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और कम आय वाले वर्गों में कवरेज अभी भी अधूरा है। हाल ही में पंजाब के मोहाली में एक लिवर हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया, जहाँ मुफ्त स्क्रीनिंग और टीकाकरण प्रदान किया गया। यह पहल कई मीडिया संगठनों जैसे द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया और द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा उजागर की गई।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि शीघ्र पहचान और टीकाकरण न केवल रोगी के जीवन को बचाते हैं बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य खर्चों को भी घटाते हैं। अगर 2025 तक स्क्रिनिंग कवरेज 70% तक पहुँचाया जाए, तो अनुमान है कि अगले पाँच वर्षों में हेपेटाइटिस‑संबंधी मृत्यु दर में 40% तक कमी आएगी।
डॉ. अंजली शर्मा, संक्रमण रोग विशेषज्ञ, कहती हैं: "समय पर पहचान जीवन बचाती है और लंबी अवधि के स्वास्थ्य खर्चों को कम करती है।"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भारत में हेपेटाइटिस टीकाकरण की अनुशंसित आयु क्या है?
उत्तर: राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत नवजात शिशुओं को जन्म के 24 घंटे के भीतर पहली खुराक दी जाती है, और दो साल की आयु तक पूरी श्रृंखला पूरी की जाती है।
प्रश्न 2: लोग मुफ्त स्क्रीनिंग कैंप कैसे खोज सकते हैं?
उत्तर: राज्य स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट, स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और प्रमुख समाचार पोर्टलों पर कैंप की तिथि एवं स्थान की जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है।