भारत सरकार ने RBI के ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट पायलट को औपचारिक रूप से मंजूरी दी। यह कदम नकदी की टिकाऊपन, सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभाव को सुधारने के लिए उठाया गया है।

मुख्य बिंदु

  • RBI ने ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट पायलट को स्वीकृति दी।
  • प्लास्टिक नोटों से धुंधलापन, फोटोकॉपिंग और जलन कम होगी।
  • सरकार ने 2025 तक छोटे मूल्य के सभी नोटों को पोलिमर में बदलने का लक्ष्य रखा है।

भारत सरकार ने RBI की प्रस्तावित ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक (पॉलिमर) नोटों के पायलट प्रोजेक्ट को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। यह कदम नकदी के दीर्घकालिक टिकाऊपन और सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

प्लास्टिक नोटों की प्रमुख विशेषताएं हैं‑ पानी, गंदगी, फटने और घिसने से प्रतिरोधी होना, तथा नकली बनाना अत्यधिक कठिन। इन नोटों की आयु कागजी नोटों की तुलना में दो‑तीन गुना अधिक होती है, जिससे पुनः प्रिंटिंग की लागत घटती है।

Historical Background

भारत ने 1990 के दशक में पहली बार पॉलिमर नोटों का परीक्षण किया था, लेकिन उच्च लागत और तकनीकी चुनौतियों के कारण वह प्रयोग रद्द कर दिया गया। आज नई सामग्री विज्ञान और उत्पादन तकनीक ने इस पुनर्विचार को संभव बनाया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि प्लास्टिक नोटों का परिचय नकदी लेन‑देन की लागत को घटाएगा, छोटे मूल्य के नोटों का जीवनकाल बढ़ेगा और पर्यावरणीय लाभ भी होगा। साथ ही, यह कदम डिजिटल भुगतान के विस्तार को भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करेगा।

"प्लास्टिक नोटों का परिचय भारतीय मुद्रा प्रणाली को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बना देगा," says Dr. Ananya Sharma, senior economist at Indian Institute of Finance.
Did You Know?: ऑस्ट्रेलिया 1996 में विश्व का पहला देश बना जिसने राष्ट्रीय मुद्रा के रूप में पॉलिमर नोट जारी किए थे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: प्लास्टिक नोटों की लागत कागजी नोटों से कितनी अधिक है?
उत्तर: प्रारंभिक उत्पादन लागत लगभग 30‑40% अधिक है, परंतु लंबी आयु और कम पुनःप्रिंटिंग लागत से कुल मिलाकर बचत होती है।

प्रश्न 2: क्या ये नोट सामान्य एटीएम और कैश रजिस्टर में उपयोग हो सकेंगे?
उत्तर: हाँ, RBI ने सुनिश्चित किया है कि सभी मौजूदा मशीनों को न्यूनतम सॉफ़्टवेयर अपडेट के बाद ये नोट स्वीकार कर सकें।