RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने जेन‑Z की भावनात्मक प्रवृत्ति पर टिप्पणी की, कहा कि वे शांति‑पूर्ण मन से नहीं सोचते। उन्होंने विवाह को अनुशासन और धर्म का स्रोत बताया, जबकि लाइव‑इन रिश्तों को जिम्मेदारी की कमी कहा।

मुख्य बिंदु

  • RSS प्रमुख मोहन भागवत ने जेन‑Z को ‘इमोशनल’ कहा।
  • विवाह को अनुशासन और धर्म का स्रोत बताया।
  • लाइव्ह‑इन रिश्तों को जिम्मेदारी की कमी बताया गया।

भाषण का सारांश

RSS के सरवोच्च पदाधिकारी मोहन भागवत ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर कहा कि आज की जेन‑Z पीढ़ी अत्यधिक भावनात्मक है और उनका सोच‑विचार शांति‑पूर्ण मन से नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति सामाजिक स्थिरता को चुनौती देती है।

भागवत ने यह भी कहा कि पारंपरिक विवाह व्यक्ति में अनुशासन, जिम्मेदारी और धर्मस्थापना लाता है, जबकि आज के कई युवा लाइव‑इन रिश्तों को चुनते हैं, जिसे वह “जिम्मेदारी की कमी” के रूप में देखते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

RSS ने पहले भी सामाजिक मूल्यों, पारिवारिक संरचना और राष्ट्रीय एकता के मुद्दों पर टिप्पणी की है। 2010 के दशक में भी संगठन ने वैवाहिक बंधन को “समाज की रीढ़” कहा था, और आधुनिक संबंधों को अक्सर “अस्थिर” कहा गया। यह बयान इस निरंतर रुख को दर्शाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that such statements from a figure like Bhagwat can sway public opinion, especially among youth who are navigating career pressures and evolving social norms. The clash between traditional values and modern lifestyle choices could influence policy debates on family law and education.

“जब युवा वर्ग अपनी पहचान बनाने की कोशिश में भावनात्मक रुझान दिखाता है, तो सामाजिक संस्थानों को संवाद के नए स्वरूप अपनाने चाहिए,” says Dr. Ananya Rao, sociologist.
क्या आप जानते हैं?: भारत में 2020‑2023 के बीच विवाह दर में 7% की गिरावट आई, जबकि लाइव्ह‑इन साझेदारी में 15% की वृद्धि हुई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: मोहन भागवत ने जेन‑Z को ‘इमोशनल’ क्यों कहा?

उत्तर: उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकता को कमजोर कर सकती है।

प्रश्न 2: क्या यह टिप्पणी सरकारी नीति को प्रभावित करेगी?

उत्तर: सीधे तौर पर नहीं, पर सामाजिक विचारधारा में बदलाव लाने की संभावना है।