विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पात्र विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन और ओडीएल मोड में एक‑साल के स्नातकोत्तर कार्यक्रम चलाने की अनुमति दी। चार‑साल की ऑनर्स स्नातक डिग्री वाले छात्रों को अब इस लचीले विकल्प का लाभ मिलेगा।

मुख्य बातें

  • UGC ने एक वर्ष के पीजी कार्यक्रम को ऑनलाइन और दूरी शिक्षा मोड में शुरू करने की अनुमति दी।
  • केवल वही विश्वविद्यालय जो दो‑साल के ओडीएल/ऑनलाइन पीजी कार्यक्रम के लिए मान्य हैं, वही इस नई डिग्री पेश कर सकते हैं।
  • पात्रता हेतु चार‑साल की ऑनर्स स्नातक डिग्री अनिवार्य है, जबकि प्रोफेशनल कोर्स जैसे MBA, MCA आदि अपने नियामक मानदंडों का पालन करेंगे।

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026 – राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भारत के उच्च शिक्षा प्रणाली में एक और महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक परिपत्र जारी किया, जिसमें पात्र उच्च शिक्षा संस्थानों को ऑनलाइन और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) के माध्यम से एक‑साल के स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दी गई है।

यह नई अनुमति केवल उन संस्थानों तक सीमित है जिन्होंने पहले से दो‑साल के समान विषय में ODL या ऑनलाइन मोड में मान्य कार्यक्रम चलाया है। इन संस्थानों को अपने बोर्ड ऑफ स्टडीज, अकादमिक काउंसिल और कार्यकारी काउंसिल की स्वीकृति प्राप्त करनी होगी, जिससे शैक्षणिक मानक स्थिर रहे।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह कदम छात्रों को लचीलापन प्रदान करता है, विशेषकर कामकाजी पेशेवरों और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को। साथ ही, यह NEP 2020 के लक्ष्य के साथ संरेखित है, जो उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और समयसापेक्ष बनाना चाहता है।

"एक साल के पीजी को ऑनलाइन उपलब्ध कराना भारत में शैक्षणिक पहुँच को democratize करने की दिशा में एक बड़ा कदम है," कहते हैं डॉ. रवीन्द्र कुमार, पूर्व UGC सदस्य।
क्या आप जानते हैं?: 2020 के बाद से UGC ने 150 से अधिक संस्थानों को ऑनलाइन डिग्री प्रदान करने की स्वीकृति दी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: कौन से कोर्स 1‑साल के ऑनलाइन पीजी के तहत उपलब्ध होंगे?
उत्तर: मुख्यतः विज्ञान, मानविकी और सामाजिक विज्ञान में मान्य दो‑साल के कार्यक्रम वाले कोर्स, जबकि MBA, MCA आदि अपने नियामक निकायों के नियमों के अनुसार चलेंगे।

प्रश्न 2: क्या इस नई व्यवस्था से डिग्री की मान्यता पर असर पड़ेगा?
उत्तर: नहीं। UGC ने स्पष्ट किया है कि सभी शैक्षणिक मानक और क्रेडिट फ्रेमवर्क को बरकरार रखा जाएगा, जिससे डिग्री की मान्यता में कोई बदलाव नहीं होगा।