झारखंड के पहले मुख्यमंत्री और विपक्षी नेता बाबुलाल मारांडी ने झारखंड सार्वजनिक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में alleged irregularities को लेकर CBI जांच की सख्त मांग की है, यह तर्क देते हुए कि CID की जांच सार्वजनिक भरोसा नहीं जीत सकती।

मुख्य बिंदु

  • मारांडी ने JPSC परीक्षा में CBI जांच की माँग की।
  • सरकार ने CID जांच जारी रखी, पर आलोचकों ने उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
  • जांच के बाद कई अधिकारी गिरफ्तार, TDPL कंपनी को पहले भी ब्लैकलिस्ट किया गया था।

बाबुलाल मारांडी, झारखंड विधानसभा के विपक्षी नेता और राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री, लगातार एक ही माँग पर जोर दे रहे हैं: झारखंड सार्वजनिक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा प्रणाली में CBI द्वारा स्वतंत्र जांच। उन्होंने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस, छात्रों के साथ मुलाक़ातें और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कई पत्र लिखकर इस मुद्दे को राष्ट्रीय मंच पर लाया है।

जुलाई 2 को JPSC ने 14वें संयुक्त सिविल सर्विसेज प्रीलिमिनरी परीक्षा के परिणाम घोषित किए, जिसमें केवल 103 पदों के लिए 2,204 सफल उम्मीदवारों की सूची थी। परिणामों के साथ ही कट‑ऑफ़ मार्क्स का वर्गीकरण नहीं किया गया, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्न उठे। इस असंतोष ने छात्रों को मात्र 17 दिनों में मेन्स परीक्षा की तैयारी करने के लिए मजबूर कर दिया।

स्थिति और बिगड़ी जब 21 जुलाई को CID ने आठ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया, जिनमें उप‑परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और लखनऊ स्थित TSR Data Processing Private Limited (TDPL) के दो निदेशक शामिल थे। अधिकारियों ने परीक्षा डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड्स में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया। TDPL को मई 2025 में झारखंड स्टाफ चयन आयोग (JSSC) द्वारा ब्लैकलिस्ट किया गया था, फिर भी वह JPSC के संवेदनशील कार्यों को संभाल रहा था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस विवाद का प्रभाव केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है; यह झारखंड के सार्वजनिक भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता को चुनौती देता है। यदि भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार नज़रअंदाज़ किया गया तो युवा प्रतिभाओं का भविष्य धूमिल हो सकता है, जिससे राज्य की प्रशासनिक क्षमता कमजोर होगी।

"एक स्वतंत्र CBI जांच ही इस संकट को सच्ची शुद्धता के साथ हल कर सकती है, क्योंकि वही संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर भरोसेमंद माना जाता है," कहा गया है एक चुनावी विशेषज्ञ ने।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

झारखंड में पिछले दशकों में कई बार भर्ती घोटालों का सामना करना पड़ा है, जिसमें 2022 के JSSC टेंडर घोटाला और 2023 के इंजीनियरिंग एंट्री स्कैम शामिल हैं। इन घटनाओं ने राज्य में merit‑based चयन की वैधता को लगातार चुनौती दी है।

क्या आप जानते हैं?: 2024 में झारखंड में सबसे अधिक अदालत में दाखिल भर्ती‑संबंधी मामलों की संख्या 45 थी, जो राष्ट्रीय औसत से दो गुना अधिक थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: CBI जांच कब शुरू हो सकती है?
उत्तर: यदि अदालत द्वारा निर्देशित किया गया तो CBI तुरंत जांच आरंभ कर सकती है, लेकिन प्रक्रिया में कई हफ्ते लग सकते हैं।

प्रश्न 2: क्या अन्य राज्य भी इसी तरह की जांच की मांग कर रहे हैं?
उत्तर: हाँ, कई राज्य में समान भर्ती‑संबंधी घोटालों को लेकर CBI की भागीदारी की मांग बढ़ रही है।