रांची में JPSC और JSSC में alleged धोखाधड़ी के खिलाफ छात्र आंदोलन का नया चेहरा बन गया देवेंद्र नाथ महतो। उन्होंने 2026 में शुरू की भूख हड़ताल से सरकार को जवाबदेह बनाने की ठान ली है।
मुख्य बिंदु
- देवेंद्र नाथ महतो ने JPSC/JSSC धोखाधड़ी के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की।
- दो पोस्ट‑ग्रेजुएट डिग्रियों और कई प्रथम श्रेणी मान्यताएँ उनके शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाती हैं।
- उनका आंदोलन झारखंड सरकार की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग करता है।
परिचय
रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्र आंदोलन के नए चेहरा, देवेंद्र नाथ महतो, को अक्सर “Sonam Wangchuk 2.0” कहा जाता है। JPSC और JSSC में alleged धोखाधड़ी के खिलाफ उन्होंने 5 जुलाई को पहला कदम उठाया और तब से भूख हड़ताल जारी रखी है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
कापीडीह गांव से शुरू हुई उनकी शिक्षा यात्रा में उन्होंने 2006 में मैट्रिक, 2008 में इंटरमीडिएट दोनों में प्रथम श्रेणी प्राप्त की। बाद में रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में प्रथम श्रेणी से ग्रेजुएशन, बीएड और दो पोस्ट‑ग्रेजुएट डिग्रियाँ (संस्कृत तथा कुरमाली) भी प्रथम श्रेणी में पूरी की।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
झारखंड में पिछले दशकों में छात्र आंदोलन अक्सर परीक्षा संबंधित मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं, लेकिन 2026 का JPSC/ JSSC घोटाला राज्य‑स्तर की सबसे बड़ी परीक्षा‑धोखाधड़ी माना जाता है। इस पूर्वाग्रह ने युवा वर्ग को संगठित कर एक सशक्त जन‑ज़ी आंदोलन में बदल दिया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that Mahato’s hunger strike not only pressures the Jharkhand government to audit the exam process but also signals a broader shift: Generation‑Z is demanding transparency and accountability in public institutions across India.
“यदि छात्रों की आवाज़ को सुना नहीं गया, तो यह लोकतंत्र की बुनियाद को हिला देगा,” कहा शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंह।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: देवेंद्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल कब शुरू की?
उत्तर: उन्होंने 5 जुलाई, 2026 को JPSC प्री‑लिम्स परिणाम में irregularities देख कर हड़ताल शुरू की।
प्रश्न 2: आंदोलन के मुख्य माँगें क्या हैं?
उत्तर: पूरी JPSC और JSSC परीक्षा प्रक्रिया में स्वतंत्र जांच, छात्रों के स्कॉलरशिप अधिकार, और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए कड़े उपाय।