आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) आज से तीन‑दिन की बैठक शुरू कर रही है, जबकि 68 में से 72 अर्थशास्त्री उम्मीद कर रहे हैं कि वैश्विक दर‑हाइक के बावजूद रेपो दर अपरिवर्तित रहेगी।
मुख्य बातें
- आरबीआई एमपीसी की तीन‑दिन की बैठक आज से शुरू
- अधिकांश अर्थशास्त्री रेपो दर में कोई बदलाव नहीं की उम्मीद
- वैश्विक स्तर पर कई केंद्रीय बैंकों ने दरें बढ़ाई, भारत अलग राह पर
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) आज से तीन‑दिन की बैठक शुरू कर रही है। वैश्विक स्तर पर महंगाई और तेल की कीमतों में उछाल के बीच, 72 में से 68 अर्थशास्त्री उम्मीद कर रहे हैं कि रेपो दर अपरिवर्तित रहेगी।
आरबीआई की नीति बैठक: क्या उम्मीदें हैं?
रॉयटर्स के एक सर्वे में 68 विशेषज्ञों ने कहा कि आरबीआई इस सप्ताह ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, वे संकेत दे रहे हैं कि मौद्रिक नीति की भाषा अधिक सख्त हो सकती है, क्योंकि महंगाई के दबाव धीरे‑धीरे बढ़ रहे हैं।
क्यों भारत अलग रास्ता चुन रहा है?
भारत की खुदरा महंगाई 4.38% पर है, जो आरबीआई के 2‑6% सहनशीलता बैंड के भीतर है। कोर महंगाई भी लगभग 4% पर स्थिर है, जिससे नीति निर्माताओं को अतिरिक्त डेटा का इंतज़ार करने की लचीलापन मिलती है। सिटी के मुख्य भारत अर्थशास्त्री समीरन चक्रवर्ती ने कहा, "कोर महंगाई 4.5% से ऊपर नहीं गई तो 2026 में दर वृद्धि की संभावना कम है।"
"हमारी राय है कि कोर महंगाई 4.5% से ऊपर नहीं बढ़ेगी तो इस वर्ष दर वृद्धि असंभव है।" - समीरन चक्रवर्ती, सिटी के मुख्य भारत अर्थशास्त्री
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यदि आरबीआई दरें स्थिर रखता है, तो गृह ऋण दरों में स्थिरता बनी रहेगी, जिससे घर खरीदारों को निश्चितता मिलेगी और रियल एस्टेट बाजार में निवेश का माहौल सकारात्मक रहेगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दो वर्षों में, भारत ने कई बार वैश्विक महंगाई के दबाव के बावजूद अपनी नीति दर को स्थिर रखा है। यह रणनीति आर्थिक विकास को समर्थन देती रही है, जबकि विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए पूँजी प्रवाह को आसान बनाया गया है।
Frequently Asked Questions
- आरबीआई एमपीसी बैठक कब से शुरू हुई?
- अर्थशास्त्री रेपो दर के बारे में क्या अनुमान लगा रहे हैं?