झारखंड के JSSC CGL परीक्षा में अभय तिवारी के सगे‑संबंधियों के साथ दूर‑दराज के रिश्तेदारों को भी नौकरी की लॉटरी मिली। CID की जांच में बड़े आरोप सामने आए हैं, जबकि छात्रों ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया।
मुख्य बिंदु
- अभय तिवारी के रिश्तेदारों को BSO पदों में लॉटरी मिली
- सीआईडी ने 40 लाख रुपये के ‘रेट कार्ड’ की जांच शुरू की
- रांची में छात्र प्रदर्शन जारी, सुरक्षा बलों की लाठीचार्ज
झारखंड के JSSC CGL परीक्षा में एक बड़े ‘जॉब स्कैम’ का पर्दाफाश हुआ है। अभय तिवारी के सगे‑भाई, साली‑भाई और दूर‑दराज के रिश्तेदारों को ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) की मेरिट लिस्ट में ‘लॉटरी’ के माध्यम से चयनित किया गया, जैसा कि छात्रों द्वारा शेयर किए गए इंफोग्राफिक में दिखाया गया है।
सीआईडी की पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस ‘गारंटीड सिलेक्शन’ के नाम पर 25‑40 लाख रुपये की ‘रेट कार्ड’ फीस ली गई थी। साथ ही, 15 उम्मीदवारों को बोकारो ले जाकर परीक्षा से पहले 65 प्रश्न‑उत्तर रटवाए जाने का भी आरोप है।
Historical Background
JSSC CGL परीक्षा, जो राज्य सरकार की विभिन्न पदों के लिए भर्ती करती है, पहले भी कई बार भ्रष्टाचार और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के सामने आई है। 2020‑2022 में इसी परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों को अनियमित लाभ मिलने के कई आरोप लगे थे, लेकिन व्यापक जांच नहीं हुई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that such scams undermine meritocracy, demotivate genuine aspirants, and erode public trust in government institutions. जब परीक्षा को परिवारिक ‘नौकरी गारंटी योजना’ बना दिया जाता है, तो सामाजिक असमानता और आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है।
"जाँच में स्पष्ट हो गया है कि यह केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित नेटवर्क है जो परीक्षा प्रणाली को विकृत कर रहा है," कहा विशेषज्ञ ने।
Frequently Asked Questions
- क्या अभय तिवारी के रिश्तेदारों को वास्तविक रूप से नौकरी मिली? हाँ, उनके नाम BSO मेरिट लिस्ट में दिखाए जा रहे हैं, पर उनकी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
- सीआईडी की जांच कब तक पूरी होगी? वर्तमान में मामले की जटिलता के कारण प्रक्रिया जारी है, लेकिन अधिकारियों ने शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया है।