जनगणना 2027 में 11 अतिरिक्त प्रश्न जोड़े गए हैं, जिनमें जाति, आधार, मोबाइल नंबर और कोविड-19 वैक्सीन स्थिति शामिल हैं। ये बदलाव डेटा संग्रह के दायरे को विस्तृत करेंगे और सामाजिक नीति पर असर डालेंगे।
मुख्य बिंदु
- जनगणना 2027 में 11 नए प्रश्न शामिल
- जाति, आधार, मोबाइल और वैक्सीन जानकारी एकत्रित होगी
- डेटा नीति एवं गोपनीयता पर नई बहसें उत्पन्न
भारत सरकार ने जनगणना 2027 के लिए गृह प्रश्नावली में 11 अतिरिक्त प्रश्नों को शामिल किया है। इन प्रश्नों में सामाजिक वर्गीकरण के लिए जाति, पहचान के लिए आधार नंबर, संचार के लिए मोबाइल नंबर और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए कोविड-19 वैक्सीन स्थिति की जानकारी मांगी जाएगी।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने इस परिवर्तन को आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया, जिससे विभिन्न राज्य और केंद्र सरकारें तैयारी शुरू कर रही हैं। इस कदम को लेकर विपक्षी दलों ने डेटा संग्रह के इरादों पर सवाल उठाए हैं, जबकि कई विशेषज्ञ इसे नीति निर्माण में मददगार मानते हैं।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
पहली बार भारत ने 1931 में जाति‑आधारित प्रश्नावली शामिल की थी, लेकिन 2011 के बाद से ऐसी विस्तृत जानकारी नहीं ली गई थी। अब 2027 में इसे पुनः पेश किया जा रहा है, जो सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण को गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the inclusion of Aadhaar and mobile details will enable real‑time demographic mapping, influencing resource allocation, electoral delimitation, and public health interventions.
"डेटा संग्रह में पारदर्शिता अनिवार्य है, वरना यह सामाजिक विभाजन को बढ़ा सकता है," कहा डेटा सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. रवींद्र सिंह ने।
Frequently Asked Questions
- क्या आधार नंबर को जनगणना में अनिवार्य किया गया है? हाँ, यह नया प्रश्न सभी घरों से आधार संख्या प्रदान करने का अनुरोध करता है।
- क्या वैक्सीन स्थिति को सार्वजनिक किया जाएगा? नहीं, यह केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए गोपनीय रखी जाएगी।