जल शक्ति के राज्य मंत्री ने बताया कि मेकेदातु जलाशय परियोजना का विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट 2019 में वापस भेजा गया था, लेकिन संशोधित संस्करण अभी तक नहीं मिला। यह देरी कावेरी जल आवंटन और अंतर‑राज्य संबंधों को प्रभावित कर सकती है।

मुख्य बिंदु

  • 2019 में प्रस्तुत मूल डीपीआर को संशोधन हेतु वापस किया गया।
  • संशोधित डीपीआर अभी तक जल आयोग को प्राप्त नहीं हुआ।
  • सीडब्ल्यूडीटी पुरस्कार और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूपता अभी बाकी है।

जल शक्ति के राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा सांसद कमल हासन को बताया कि कर्नाटक के मेकेदातु बैलेंसिंग जलाशय एवं पेयजल परियोजना का विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) 2019 में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन उसे कावेरी जल विवाद ट्राइब्यूनल (सीडब्ल्यूडीटी) के पुरस्कार और सेंट्रल वाटर कमिशन (सीडब्ल्यूसी) के दिशानिर्देशों के अनुरूप संशोधित करने के लिए परियोजना प्राधिकरण को वापस भेजा गया।

अब तक संशोधित डीपीआर सीडब्ल्यूसी को नहीं मिला है, जिससे आवश्यक तकनीकी‑आर्थिक मूल्यांकन में देरी हो रही है।

सीडब्ल्यूसी कावेरी बेसिन में जल संसाधन परियोजनाओं के डीपीआर का मूल्यांकन सीडब्ल्यूडीटी पुरस्कार और 16 फरवरी 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार करता है, जिससे राज्य‑स्तरीय प्रस्ताव राष्ट्रीय मानकों के साथ संरेखित हों।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि संशोधित डीपीआर की अनुपस्थिति जल‑वितरण निर्णयों को रोक रही है, जिससे कर्नाटक के लाखों लोगों और नीचे स्थित तमिलनाडु के जल‑आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, साथ ही अंतर‑राज्य वार्ताओं में ठहराव आ सकता है।

“संशोधित डीपीआर के बिना कावेरी ट्राइब्यूनल कानूनी रूप से जल रिलीज़ को स्वीकृत नहीं कर सकता, जिससे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन हो सकता है।”

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मेकेदातु परियोजना, जो बैंगलोर के पेयजल आपूर्ति के लिए कावेरी जल को अवरोधित करने हेतु बैलेंसिंग जलाशय के रूप में प्रस्तावित थी, 2007 से कर्नाटक‑तमिलनाडु जल विवाद का बिंदु रही है। 2018 के सीडब्ल्यूडीटी पुरस्कार ने जलाशय क्षमता, पर्यावरणीय मंजूरी और अंतर‑राज्य जल‑साझाकरण के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश निर्धारित किए थे।

क्या आप जानते हैं?: कावेरी बेसिन 30 मिलियन से अधिक लोगों को तीन राज्यों में जल आपूर्ति करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: संशोधित डीपीआर कब तक आएगा?
मंत्रालय ने अभी तक स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी है; अधिकारी व्यापक अनुपालन जांच की आवश्यकता बताते हैं।

प्रश्न 2: यदि डीपीआर में देरी जारी रही तो क्या होगा?
परियोजना अंतिम मंजूरी नहीं प्राप्त कर पाएगी, जिससे बैंगलोर में जल आपूर्ति वृद्धि में देरी और अंतर‑राज्य तनाव बढ़ सकता है।