भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंथ नगेसवारन ने जल को योजना, निर्माण और भुगतान योग्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के रूप में देखे जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जल मूल्य निर्धारण, भूमि उपयोग और जल भंडारण के मुद्दों को उजागर किया।
मुख्य बिंदु
- पानी को इन्फ्रास्ट्रक्चर मानना आवश्यक है
- जल की कीमत शून्य नहीं होनी चाहिए
- भूमि उपयोग नीति में सुधार आवश्यक है
मुख्य बातें
मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंथ नगेसवारन ने चेन्नई में आयोजित तमिलनाडु इन्फ्रास्ट्रक्चर समिट 2026 में कहा कि जल को उसी तरह से देखा जाना चाहिए जैसा हम सड़कों और बिजली को देखते हैं – योजना, निर्माण और भुगतान योग्य.
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जल को मुक्त मानकर शून्य मूल्य पर दिया जा रहा है, जिससे अपव्यय और अधूरे बुनियादी ढाँचे की समस्या उत्पन्न होती है. "जब हम जल को मुफ्त मानते हैं, तो हम उसे नष्ट कर देते हैं," उन्होंने कहा.
नगेसवारन ने भूमि उपयोग में मौजूद "फ़्लोर स्पेस इंडेक्स" (FSI) को भी समस्यात्मक बताया. भारत में FSI कई विकसित शहरों से बहुत कम है, जिससे शहरी विस्तार बाहर की ओर होता है और पुराने जलाशयों को भरकर जमीन बनानी पड़ती है.
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में जल प्रबंधन का इतिहास प्राचीन काल के जल टैंकों और नहरों तक जाता है, परन्तु स्वतंत्रता के बाद गति धीमी रही. शहरीकरण की तेज़ी ने कई प्राकृतिक जल स्रोतों को नष्ट कर दिया, जिससे आज जल संकट गहरा है.
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a transparent water pricing model can unlock billions in investment for sustainable reservoirs, directly benefiting vulnerable households while curbing waste.
"सही मूल्य निर्धारण ही जल सुरक्षा का मूल है," जल नीति विशेषज्ञ डॉ. रवींद्र सिंह ने कहा.
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: जल को इन्फ्रास्ट्रक्चर मानने का अर्थ क्या है?
उत्तर: इसका मतलब है कि जल आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक योजना, निर्माण और उचित शुल्क संरचना होनी चाहिए.
प्रश्न 2: जल मूल्य निर्धारण कैसे गरीबों को लाभ पहुंचा सकता है?
उत्तर: सही मूल्य निर्धारण से सब्सिडी को लक्षित किया जा सकता है, जिससे वास्तव में जरूरतमंद घरों को सस्ती जल आपूर्ति मिल सके.