शुक्रवार को डॉलर के कमजोर होने और मुद्रास्फीति आंकड़ों के स्थिर रहने से सोने की कीमतों में वृद्धि हुई, जिससे फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कम हो गई। तेल की कीमतें भी तनावपूर्ण स्थितियों के कारण बढ़ी, जबकि अन्य कीमती धातुें अलग-अलग प्रदर्शन कर रही हैं।
मुख्य बिंदु
- डॉलर सूचकांक में 0.3% गिरावट, सोने की कीमतें 0.7% बढ़ीं
- फेडरल रिजर्व के दर वृद्धि की संभावना 33% तक घट गई
- तेल की कीमतें होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के कारण बढ़ी
बाजार की मुख्य चाल
शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड 0.7% बढ़कर $4,379.95 प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में लाभ उठाने के कारण 1.3% गिरावट देखी गई थी। यह बढ़त इस सप्ताह लगभग 0.9% की कुल वृद्धि दर्शाती है। अमेरिकी डॉलर सूचकांक में 0.3% की गिरावट ने विदेशी निवेशकों के लिए सोने को अधिक सुलभ बना दिया।
अमेरिकी मुद्रास्फीति डेटा इस सप्ताह अपेक्षित स्तर पर आया, जिससे फेडरल रिजर्व के अगले महीने दर वृद्धि न करने की संभावना बढ़ी। CME की FedWatch टूल के अनुसार, सितंबर में दर वृद्धि की संभावना 55% से घटकर 33% हो गई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में, डॉलर की ताकत और मुद्रास्फीति के बीच का संबंध सोने की कीमतों को प्रभावित करता आया है। 2020 के शुरुआती दौर में, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने सोने को एक सुरक्षित आश्रय बना दिया था, जबकि 2022 में तेज़ ब्याज दर वृद्धि ने सोने की कीमतों को दबाव में रखा था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a weaker dollar combined with stable inflation strengthens the case for a rate‑hold, which traditionally supports non‑yielding assets like gold, potentially extending its upside in the coming weeks.
"यदि फेड दर नहीं बढ़ाता, तो सोने की कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं," कहा गया है एक प्रमुख बाजार विश्लेषक ने।
Frequently Asked Questions
सवाल: क्या डॉलर की कमजोरी सोने की कीमतों को दीर्घकालिक रूप से बढ़ाएगी?
जवाब: यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें वैश्विक आर्थिक स्थिरता और फेड की नीति शामिल हैं।
सवाल: तेल की कीमतों में वृद्धि का सोने पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
जवाब: उच्च तेल कीमतें अक्सर मुद्रास्फीति को बढ़ावा देती हैं, जिससे फेडरल रिजर्व को दर बढ़ाने के दबाव में ला सकती हैं, जो सोने के लिए बुरा हो सकता है।