आंध्र प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (APSRTC) के गजुwakा और सिंहापुरी में इलेक्ट्रिक बस डिपो के लिए नई विद्युत कनेक्शन और ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए गए हैं। यह कदम राज्य की स्वच्छ परिवहन नीति को तेज़ करने के साथ-साथ भविष्य की चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की नींव रखता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- APSRTC के गजुwakा और सिंहापुरी डिपो में नई बिजली कनेक्शन और ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए गए।
- चार्जिंग स्टेशन और प्लेटफ़ॉर्म निर्माण अगले महीने तक पूरा होगा।
- आंध्र प्रदेश की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी योजना में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
आंध्र प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (APSRTC) ने अपने दो प्रमुख इलेक्ट्रिक बस डिपो—गजुwakा और सिंहापुरी—में नई विद्युत कनेक्शन और ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए हैं। यह कार्य एपीईपीडीसीएल (Andhra Pradesh Energy Power Distribution Company Ltd) द्वारा, उसके चेयरमन और मैनेजिंग डायरेक्टर के निर्देशों के तहत पूरा किया गया।
संयुक्त निरीक्षण और प्रमुख अधिकारी
जुलाई 11, 2026 को APSRTC के विज़ाखापट्नम रीजनल मैनेजर बी. अप्पाला नायडु और एपीईपीडीसीएल के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर श्याम बाबू ने दोनो डिपो का संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण टीम में दोनों संस्थानों के इंजीनियरों और कर्मचारियों ने भाग लिया, जिससे कार्य की प्रगति का व्यापक मूल्यांकन संभव हुआ।
इन्फ्रास्ट्रक्चर की वर्तमान स्थिति
अब तक प्राथमिक विद्युत बुनियादी ढांचा स्थापित हो चुका है, जिसमें हाई-वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर, सबस्टेशन और केबलिंग शामिल हैं। शेष कार्य में इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन, प्लेटफ़ॉर्म का विकास, और भवन संबंधी निर्माण को अगले महीने तक पूर्ण करने की योजना है। यह चरण-वार कार्यान्वयन APSRTC के इलेक्ट्रिक फ़्लीट को जल्द ही पूर्णता की ओर ले जाएगा।
आंध्र प्रदेश की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पहल
आंध्र प्रदेश सरकार ने 2024 में स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए 1,000 इलेक्ट्रिक बसों की लक्ष्य निर्धारित की थी। गजुwakा और सिंहापुरी में स्थापित नई पावर लाइनों से इस लक्ष्य की दिशा में काफी गति मिली है। चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की तेज़ी से उपलब्धता न केवल पर्यावरणीय लाभ देती है, बल्कि शहरी ट्रैफ़िक में उत्सर्जन घटाने में भी मददगार सिद्ध होगी।
भविष्य की संभावनाएं
जब ये डिपो पूर्ण रूप से कार्यशील हो जाएंगे, तो APSRTC की इलेक्ट्रिक बसों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मॉडल को अन्य शहरों में दोहराने से भारत में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन का विस्तार तेज़ होगा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता मजबूत होगी।