केरल सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रियांश्री मुक्त यात्रा योजना के बाद केएसआरटीसी ordinary बसों पर महिला यात्रियों की दैनिक संख्या 6.48 लाख से बढ़कर 12.12 लाख हो गई। इस वृद्धि ने पुरुष यात्रियों की संख्या में कोई कमी नहीं लाई, मंत्री ने कहा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केएसआरटीसी ordinary बसों पर महिला यात्रियों का दैनिक संख्या 87% बढ़ी
  • महिला यात्रियों का हिस्सा 50.9% से 66.6% तक बढ़ा
  • पुरुष यात्रियों की संख्या स्थिर रही, नई मांग उत्पन्न हुई

केरल राज्य के परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रियांश्री मुक्त यात्रा योजना के कार्यान्वयन के बाद केएसआरटीसी ordinary बसों पर महिला यात्रियों की औसत दैनिक संख्या 6.48 लाख से बढ़कर 12.12 लाख हो गई, जो 87% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है।

संख्यात्मक विश्लेषण और प्रतिशत परिवर्तन

नवीनतम डेटा के अनुसार, केएसआरटीसी ordinary बसों पर महिला यात्रियों का हिस्सा 50.9% से बढ़कर 66.6% हो गया। साथ ही, पूरे केएसआरटीसी नेटवर्क (ordinary एवं सुपर‑क्लास) पर कुल यात्रियों की औसत दैनिक संख्या 19.03 लाख से बढ़कर 24.53 लाख रही, यानी 28.9% की समग्र वृद्धि। यह संकेत देता है कि योजना ने केवल मौजूदा यात्रियों को पुनः वितरण नहीं किया, बल्कि सार्वजनिक परिवहन के लिए नई यात्रा माँग (induced demand) भी उत्पन्न की।

पर्यावरणीय लाभ और ईंधन बचत

मंत्री ने बताया कि अतिरिक्त यात्रियों को मौजूदा नेटवर्क में समायोजित करने से प्रति यात्री ईंधन खपत में कमी आई और कार्बन उत्सर्जन घटा। यह न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि केरल की हरित विकास रणनीति में भी योगदान देता है।

पुरुष यात्रियों पर प्रभाव

योजना के लागू होने के बाद पुरुष यात्रियों की संख्या लगभग स्थिर रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि महिला यात्रियों की बढ़ोतरी ने अन्य वर्गों के यात्रियों को नहीं घटाया। इस संतुलन ने सार्वजनिक परिवहन को अधिक समावेशी और सुरक्षित बनाने में मदद की, विशेषकर महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए।

अस्थायी कर्मचारियों को लेकर विवाद और सरकार की प्रतिक्रिया

वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने केएसआरटीसी द्वारा 200 अस्थायी कर्मचारियों को निकालने और 6,000 कर्मचारियों के वेतन में देरी का आरोप लगाया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार के तहत कोई भी अस्थायी स्टाफ़ को नहीं निकाला गया है, केवल वेतन भुगतान में देरी हुई है, जिसे शीघ्र हल किया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक डिपो में ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट कमिटी की स्थापना की गई है, जिससे संचालन में सुधार और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा होगी।

आगे का मार्ग

केरल सरकार की यह पहल सार्वजनिक परिवहन को महिलाओं के लिए अधिक सुलभ बनाते हुए, सामाजिक समानता और पर्यावरणीय स्थिरता को दोहरा लाभ प्रदान कर रही है। यदि इस मॉडल को अन्य भारतीय राज्यों में अपनाया जाता है, तो राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक परिवहन के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।