टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है जिससे अंगों को बिना बर्फ जमाए बेहद कम तापमान पर सुरक्षित रखा जा सकता है। शोधकर्ताओं ने सुअर के अंगों पर सफल परीक्षण कर दिखाया है कि अब किडनी को कई दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

मुख्य बातें

  • वैज्ञानिकों ने अंगों को बिना बर्फ बनाए -4 °C तक ठंडा रखने में सफलता पाई है।
  • सुअर की किडनी को 72 घंटों तक सुरक्षित रखने के बाद भी वे सफलतापूर्वक काम कर रही हैं।
  • यह तकनीक अंग दान की कमी और अंगों के खराब होने की समस्या को हल कर सकती है।

अंग दान के क्षेत्र में समय सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है। जैसे ही किसी दाता के शरीर से अंग निकाला जाता है, वह खराब होने लगता है। वर्तमान में, अंगों को बर्फ पर लगभग 4 °C पर रखा जाता है, लेकिन उन्हें जमाया नहीं जा सकता क्योंकि बर्फ के क्रिस्टल ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं।

एक क्रांतिकारी समाधान: सुपरकूलिंग तकनीक

टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी के मैथ्यू पॉवेल पाल्म और उनकी टीम ने एक ऐसा उपकरण विकसित किया है जो अंगों को बिना बर्फ बनाए -4 °C (25 °F) तक ठंडा रख सकता है। इस नई विधि को 'सुपरकूलिंग' कहा जाता है। हालिया शोध में, टीम ने सुअर के अंगों का उपयोग करके दिखाया है कि किडनी को इस उपकरण में कई दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है और प्रत्यारोपण के बाद वे सामान्य रूप से कार्य करती हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह खोज अंग प्रत्यारोपण की वैश्विक कमी को दूर करने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। अमेरिका में अकेले 1,04,000 से अधिक लोग किडनी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं, और प्रतिदिन 17 लोगों की मृत्यु हो जाती है। अक्सर, दान किए गए अंगों में से एक-तिहाई अंग इसलिए फेंक दिए जाते हैं क्योंकि वे प्राप्तकर्ता तक पहुँचने से पहले ही खराब हो जाते हैं।

यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है जो अंग संरक्षण के मानकों को बदल सकती है।

पारंपरिक तरीकों में अंगों को केवल 24 घंटों तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है, लेकिन इस नई तकनीक ने 72 घंटों तक का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि 72 घंटों तक सुपरकूल्ड रहने के बाद भी किडनी ने प्रत्यारोपण के तुरंत बाद मूत्र बनाना शुरू कर दिया, जो उनके सफल कार्य का प्रमाण है।

तुलनात्मक अध्ययन: पारंपरिक बनाम सुपरकूल्ड

विशेषतापारंपरिक (बर्फ पर)सुपरकूल्ड तकनीक
तापमान~4 °C-4 °C
सुरक्षित अवधि~24 घंटे72+ घंटे
बर्फ का जोखिमकम (पर सीमांत)शून्य (नियंत्रित दबाव में)
रिकवरी दरधीमीतेज और प्रभावी
क्या आप जानते हैं?: अंगों को ठंडा करने से उनका मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे उन्हें लंबे समय तक जीवित रखा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या यह तकनीक मनुष्यों पर लागू होगी?
वर्तमान में यह परीक्षण सुअरों पर सफल रहा है, लेकिन मानव परीक्षणों के लिए सुरक्षा मानकों और नियामक मंजूरी की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 2: सुपरकूलिंग में बर्फ क्यों नहीं जमती?
वैज्ञानिक एक विशेष उपकरण का उपयोग करते हैं जो निरंतर दबाव बनाए रखता है, जिससे शून्य से नीचे के तापमान पर भी बर्फ के क्रिस्टल नहीं बन पाते।