अभिनेता R Madhavan ने अपने बेटे Vedaant को धन के मूल्य और कृतज्ञता की भावना सिखाने के लिए रोज़मर्रा की उदाहरणें दीं। उन्होंने बताया कि उनकी रसोई के कामगार को एक साल लग सकता है उसी खिलौने को खरीदने में, जो बच्चे को असली मेहनत की समझ देता है। यह शिक्षा उनके परिवार में सम्मान और सामाजिक जागरूकता को भी मजबूती देती है।
बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता R Madhavan ने हाल ही में ACKO के 100 Year Life Project में अपने बेटे Vedaant Madhavan के विकास के पीछे की पेरेंटिंग रणनीतियों को साझा किया। Vedaant, जो अब भारत के सबसे आशाजनक प्रतिस्पर्धी तैराकों में से एक बन चुका है, अपने पिता की सख्त परंतु प्रेमपूर्ण शिक्षाओं से आकार ले रहा है।
कृतज्ञता का मूल सिद्धांत
मधवन ने कहा कि मध्यवर्गीय परिवेश में पैदा होने के बावजूद उन्होंने अपने बेटे को सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई, लेकिन साथ ही यह भी समझाया कि ये सुविधाएँ किसी की कड़ी मेहनत का फल हैं। उन्होंने अपने रसोई के कामगार की वार्षिक आय का उदाहरण देकर बताया, “क्या तुम्हें पता है कि यह खिलौना कितने में खरीदा गया? वह आदमी एक पूरे साल काम करके भी इसका एक छोटा हिस्सा नहीं खरीद सकता।” इस तरह की सच्ची बातचीत ने Vedaant में धन के वास्तविक मूल्य की समझ को गहरा किया।
सम्मान और सामाजिक जागरूकता
धन के साथ-साथ, मधवन ने अपने बेटे को सभी वर्ग के लोगों के प्रति समान सम्मान दिखाने की शिक्षा दी। “लिफ्टमैन, गार्ड, ड्राइवर, आयी—सबको ‘दीदी’ या ‘भाईया’ कह कर संबोधित करो,” उन्होंने कहा। यह केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि सामाजिक स्थितियों की समझ और ‘सिचुएशनल अवेयरनेस’ को विकसित करने का अभ्यास है।
व्यस्त बचपन: खाली समय नहीं
कनाडा में अपने छात्र जीवन के दौरान, एक परिवार से मिली सलाह ने मधवन के पेरेंटिंग दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया: “बच्चे को फ्री टाइम मत दो।” उन्होंने इस सिद्धांत को अपनाते हुए बताया कि Vedaant को विभिन्न खेल‑कूद, संगीत, और शैक्षणिक गतिविधियों में व्यस्त रखा जाता है, जिससे नकारात्मक प्रभावों की संभावना कम हो जाती है। “यह काम नहीं, बल्कि मज़ा होना चाहिए,” उन्होंने कहा, जिससे बच्चा स्वाभाविक रूप से सीखता और विकसित होता है।
परिणाम और भविष्य की दिशा
इन मूल्यों ने Vedaant को न केवल तैराकी में बल्कि सामाजिक संवाद में भी लाभ पहुंचाया है। सुरक्षा गार्डों और ड्राइवरों से मिलने वाले सकारात्मक फीडबैक ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें एक सम्मानित युवा नागरिक बना दिया। मधवन का मानना है कि यह पद्धति भविष्य में भी उनके बेटे को जीवन के विभिन्न मोड़ों पर सहारा देगी।
आज Vedaant दुबई में रहता है, जहाँ वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ कठोर प्रशिक्षण सत्रों को संतुलित कर रहा है। उसके पिता की यह पेरेंटिंग दर्शन, जो कृतज्ञता, सम्मान और व्यस्तता पर आधारित है, भारतीय माता‑पिता के लिए एक मूल्यवान मॉडल प्रस्तुत करता है।