चिट्टूर के टोटापुरी आम किसानों को राज्य की नई सब्सिडी योजना के तहत ₹4 प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य मिलेगा। चयन प्रक्रिया में ग्राम सभा के प्रस्ताव और क्रॉप e‑KYC को अनिवार्य किया गया है, जिससे पक्षपात का कोई स्थान नहीं रहेगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • टोटापुरी आम किसानों को ₹4/किग्रा सब्सिडी
  • लाभार्थी चयन में ग्राम सभा और क्रॉप e‑KYC का प्रयोग
  • आईसीआर विशेषज्ञ समिति ने दीर्घकालिक नीति सुझाव

चिट्टूर जिले के कलेक्टर सुमित कुमार ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि टोटापुरी आम की फसल में भारी नुकसान झेल रहे किसानों को राज्य सरकार की सब्सिडी पूरी पारदर्शिता के साथ दी जाएगी। इस घोषणा का मुख्य उद्देश्य लाभार्थी चयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात को समाप्त करना है।

पारदर्शी चयन प्रक्रिया

कलेक्टर ने बताया कि विशेष रूप से गठित आधिकारिक टीम ग्राम सभा के प्रस्ताव, फील्ड‑लेवल निरीक्षण, पिछले खेती के रिकॉर्ड, किसान सत्यापन और अनिवार्य क्रॉप e‑KYC के आधार पर पात्र किसानों की पहचान करेगी। इस प्रक्रिया को राज्य सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार कड़ाई से लागू किया जाएगा, जिससे सभी वास्तविक किसान बिना किसी देरी के वित्तीय सहायता प्राप्त करेंगे।

सब्सिडी का समर्थन मूल्य

केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर टोटापुरी आम की निर्यात‑आधारित मांग में गिरावट के कारण किसानों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा था। इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में सरकार ने टोटापुरी आम के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹4 प्रति किलोग्राम निर्धारित किया। यह राशि उन 35,000 से अधिक परिवारों के लिए तत्काल राहत प्रदान करने का लक्ष्य रखती है, जो मुख्यतः इस फसल से अपना जीवनयापन करते हैं।

उत्पादन एवं बाजार स्थितियां

चिट्टूर में टोटापुरी आम लगभग 51,736 हेक्टेयर भूमि में उगाया जाता है, जिससे इस मौसम में अनुमानित 5.17 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है। टोटापुरी आम मुख्यतः पल्प उत्पादन के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि ताज़ा फल के बाजार में इसकी मांग सीमित रहती है। इस कारण औद्योगिक खरीद में उतार‑चढ़ाव किसानों को असुरक्षित बनाता है।

आईसीएआर विशेषज्ञ समिति की भूमिका

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने चिट्टूर जिले का दौरा कर टोटापुरी सेक्टर की चुनौतियों का विस्तृत अध्ययन शुरू किया है। इस टीम ने किसानों, जिला अधिकारियों, पल्प निर्माता और निर्यातकों के साथ संवाद स्थापित किया है, ताकि उत्पादन, प्रोसेसिंग, गुणवत्ता सुधार, मार्केटिंग और निर्यात संबंधी मुद्दों को समझा जा सके। भविष्य में इस समिति की सिफारिशें केंद्र सरकार को दीर्घकालिक नीतियों के रूप में प्रस्तुत की जाएँगी, जिसका उद्देश्य इस मूल्यवान फसल को स्थायी बनाना है।