ग्रेटर नोएडा के एक निजी हॉस्टल ने बुनियादी सुविधाएँ नहीं दीं, जिससे बी.टेक छात्र को सिर्फ सात दिनों में ही छोड़ना पड़ा और उन्हें 40,000 रुपये का रिफंड व मुआवजा मिला। हिमाचल प्रदेश उपभोक्ता आयोग ने इस निर्णय को उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के तौर पर सराहा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- हॉस्टल ने 35,000 रुपये अग्रिम लिये लेकिन बुनियादी सुविधाएँ नहीं दीं।
- कुंवारी छात्र ने केवल 7 दिनों में हॉस्टल छोड़ दिया और 40,000 रुपये की रिफंड व मुआवजा प्राप्त किया।
- उपभोक्ता आयोग ने भविष्य में समान मामलों में तेज़ कार्यवाही की चेतावनी दी।
हिमाचल प्रदेश के कांगरा उपभोक्ता आयोग ने ग्रेटर नोएडा स्थित नालंदा लिविंग हॉस्टल को 30,000 रुपये मूल रिफंड, 9% ब्याज और 10,000 रुपये के मुआवजे का आदेश दिया, जब एक बी.टेक छात्र ने केवल सात दिन के भीतर खराब भोजन, रखरखाव की कमी और वाई‑फ़ाई की अनुपलब्धता की शिकायत की।
पृष्ठभूमि और शिकायत का मूल कारण
आर्यन रावत ने अगस्त 2023 में IILM विश्वविद्यालय में बी.टेक प्रवेश लिया और उसी दिन नालंदा लिविंग हॉस्टल का रूम बुक किया। उन्होंने 35,000 रुपये अग्रिम जमा किए, जिसमें एयर‑कंडीशन वाले कमरे, गुणवत्तापूर्ण भोजन, निरंतर वाई‑फ़ाई और नियमित रखरखाव का वादा किया गया था। लेकिन प्रवेश के बाद ही छात्र को भोजन की घटिया गुणवत्ता, रखरखाव की उपेक्षा और वाई‑फ़ाई की गैर‑उपलब्धता का सामना करना पड़ा।
कानूनी प्रक्रिया और आयोग का निर्णय
आगामी हफ्तों में छात्र ने कई बार प्रबंधक से संपर्क कर रिफंड की मांग की, पर कोई जवाब नहीं मिला। अंततः वह कांगरा उपभोक्ता आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराता है। आयोग ने बताया कि हॉस्टल ने नोटिस मिलने के बाद भी सुनवाई में उपस्थिति नहीं दी, जिससे मामला एक्स‑पार्टे (एकतरफा) रूप में आगे बढ़ा। सबूतों की जांच में आयोग ने पाया कि हॉस्टल ने बुनियादी वादे तो पूरे किए, पर वास्तविक सेवाएँ नहीं दीं, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत “सेवा में कमी” की शर्त को पूरा करता है।
रिफंड, ब्याज और मुआवजा
आयोग ने छात्र के सात‑दिन के ठहराव को ध्यान में रखते हुए 5,000 रुपये को आवास शुल्क के रूप में काटा और शेष 30,000 रुपये मूल रिफंड के रूप में लौटाने का आदेश दिया। साथ ही 9% वार्षिक ब्याज और 10,000 रुपये के अतिरिक्त मुआवजे को भी मंजूरी दी गई, ताकि भविष्य में समान धोखाधड़ी को रोका जा सके।
उपभोक्ता जागरूकता की दिशा में कदम
यह निर्णय छात्रों और उनके अभिभावकों को चेतावनी देता है कि हॉस्टल जैसी निजी संस्थाएँ अग्रिम शुल्क लेकर बुनियादी सुविधाएँ नहीं देने पर उपभोक्ता आयोग के समक्ष उत्तरदायी होंगी। दस्तावेज़ीकरण, रसीदें और वादे लिखित रूप में रखने से ऐसे मामलों में मुकदमेबाजी आसान हो जाती है। उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 या राज्य‑विशिष्ट हेल्पलाइन 1800‑180‑8087 से संपर्क कर शीघ्र सहायता ली जा सकती है।