सीबीआई ने कहा है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के एक प्रमुख आरोपी ने हरियाणा के एक उच्च अधिकारी की दुबई‑बैंकोक यात्राओं और लक्ज़री होटल ठहराव को अपने हाथों से वित्तपोषित किया। यह मामला लाखों रुपये के घोटाले और भ्रष्टाचार के नए आयाम खोलता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- रिभाव ऋषि ने हरियाणा के अधिकारी नरेश कुमार को विदेश यात्रा और होटल खर्चों से लुभाया।
- कुल मिलाकर लगभग ₹10 करोड़ की वित्तीय लाभांश अप्रत्यक्ष रूप से मिली।
- घोटाले में फर्जी खातों, झूठी चेकबुक और अनधिकृत बैंकिंग उपकरणों का प्रयोग किया गया।
सीबीआई ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुई बहु‑कोटि की धोखाधड़ी पर विस्तृत आरोपपत्र दायर किया है, जिसमें बताया गया है कि रिभाव ऋषि, चंडीगढ़ के सेक्टर‑32 शाखा के तब के ब्रांच मैनेजर, ने हरियाणा सरकार के विभागों के फर्जी खातों को खोलकर नरेश कुमार को महंगी विदेश यात्राओं और लक्ज़री होटल में ठहराव की सुविधा दी।
घोटाले की पृष्ठभूमि
2024‑25 के दौरान, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कई सरकारी योजना खातों को संभालने का काम किया, जिनमें मुख्य मंत्री ग्रामीण आवास योजना (मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना) भी शामिल थी। सीबीआई के अनुसार, इन खातों में फर्जी दस्तावेज़, नकली चेकबुक और अनधिकृत हस्ताक्षर जमा कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। इस प्रक्रिया में रिभाव ऋषि ने नरेश कुमार को मध्यस्थ के रूप में उपयोग किया, जिससे वे बैंक के भीतर अनियमित लेन‑देनों को सुगम बना पाए।
वित्तीय लाभ और यात्रा खर्च
जांच में उजागर हुआ कि नरेश कुमार को अपराध के आय के रूप में सीधे उनके यूनियन बैंक और एचडीएफसी बैंक खातों में लगभग ₹1 करोड़ की राशि मिली। इसके अलावा, स्वस्तिक देस प्रोजेक्ट्स की ओर से विभिन्न कंपनियों को भुगतान कर टॉयोटा फोर्ट्यूनर जैसी महँगी कारें खरीदी गईं। रिभाव ऋषि ने कुमार को जेडब्ल्यू मैरियट जयपुर, नॉवोटेल पुणे, दुबई के जुमेराह बुर्ज अल अरब जैसे हाई‑एंड होटलों में ठहराव करवाया, साथ ही बैंकाक, मैकाओ, मुंबई और चंडीगढ़ सहित कई शहरों की यात्रा का खर्च उठाया।
भविष्य के निहितार्थ
यह केस न केवल बैंकिंग क्षेत्र में नियामक निगरानी की कमी को उजागर करता है, बल्कि सरकारी योजना फंडों के दुरुपयोग के जोखिम को भी स्पष्ट करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने के लिए डिजिटल लेन‑देन की पारदर्शिता, सख्त ऑडिट और बैंकिंग कर्मचारियों के लिए कठोर नैतिक मानक आवश्यक हैं। सरकार की ओर से इस पर त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है, जिससे भविष्य में समान मामलों को रोकना संभव हो सके।
न्यायिक प्रक्रिया
नरेश कुमार को पहले ही हिरासत में ले लिया गया है, जबकि रिहाव ऋषि और अन्य सहयोगियों को भी कोर्ट में पेश किया गया है। आगामी सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कैसे न्यायिक प्रणाली इस बड़े वित्तीय घोटाले को सजा‑सफ़ाई के साथ समाप्त करती है।