हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा उपभोक्ता आयोग ने RedBus और भर्मानी ट्रैवल्स को 17 मिनट पहले बुकिंग रद्द करने के कारण ₹10,000 का जुर्माना लगाया। यह फैसला ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफ़ॉर्म की जिम्मेदारी को स्पष्ट करता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- RedBus ने 17 मिनट पहले बुकिंग रद्द की
- कंज्यूमर कमिशन ने दोनों पक्षों को ₹10,000 का जुर्माना लगाया
- ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को सेवा की विश्वसनीयता जांचनी अनिवार्य
कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक उल्लेखनीय निर्णय सुनाया, जिसमें RedBus Limited और भर्मानी ट्रैवल्स को एक यात्री को ₹10,000 की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया गया। यह मामला तब उभरा जब जयंत पाटियल ने 5 अक्टूबर 2023 को पालमपुर‑दिल्ली मार्ग के लिए RedBus के माध्यम से एक रात की बस बुक की, लेकिन बस तय समय से मात्र 17 मिनट पहले रद्द कर दी गई।
पृष्ठभूमि और घटना का विवरण
पाटियल ने 10:15 pm पर प्रस्थान करने वाली बस का टिकट 600 रुपये में खरीदा था। वह निर्धारित समय से 20‑30 मिनट पहले बिंदु पर पहुँचे और ऑपरेटर से पुष्टि की, तभी उन्हें बताया गया कि उस समय कोई वाहन नहीं चल रहा है। 9:58 pm पर उन्हें स्वचालित रद्दीकरण संदेश मिला, जिससे उन्हें वैकल्पिक परिवहन नहीं मिल सका। रात के देर समय में निकटतम हवाई अड्डे तक 40 किमी की यात्रा कर उन्हें एक महँगा आपातकालीन फ्लाइट बुक करनी पड़ी।
उपभोक्ता आयोग का विश्लेषण
आयोग ने कहा कि RedBus ने सेवा की विश्वसनीयता की उचित जाँच नहीं की, जबकि भर्मानी ट्रैवल्स ने निर्धारित बस नहीं चलाकर अपने दायित्वों का उल्लंघन किया। ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को केवल मध्यस्थ नहीं माना जा सकता; एक बार भुगतान स्वीकार करने, सेवा शुल्क लेने और बुकिंग की पुष्टि करने के बाद वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उत्तरदायी बन जाता है।
कंपनी की प्रतिक्रिया और न्यायिक आदेश
RedBus ने तर्क दिया कि वह केवल तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म है और वाहन शेड्यूल पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। उसने पाटियल को 585 रुपये का पूर्ण रिफंड और 60 रुपये का RedBus वॉलेट क्रेडिट किया, साथ ही दो गुना टिकेट रेट की पेशकश भी की, जिसे पाटियल ने अस्वीकार कर दिया। भर्मानी ट्रैवल्स ने सुनवाई में भाग नहीं लिया और एक्स‑पार्टे प्रक्रिया के तहत दण्डित किया गया।
आदेश और भविष्य की दिशा
आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त और व्यक्तिगत रूप से ₹5,000 मानसिक कष्ट के लिए और ₹5,000 मुकदमे के खर्च के लिए भुगतान करने का आदेश दिया, कुल ₹10,000। यह राशि 30 दिनों के भीतर भुगतान करनी होगी, अन्यथा वार्षिक 9 % ब्याज लगेगा। इस निर्णय ने ऑनलाइन बुकिंग सेवाओं के लिए पारदर्शिता और भरोसेमंदता की नई मानक स्थापित की है।