राज्य के प्रमुख सामाजिक कल्याण योजना में 3,541 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च और वर्चुअल पर्सनल डिपॉज़िट अकाउंट्स में बड़े पैमाने पर निधि जमा करने की गंभीर लापरवाही की CAG ने ओरख़ा। इस ऑडिट ने बजट अनुशासन और वित्तीय पारदर्शिता में बड़ी खामियों को उजागर किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • लड़की बहिन योजना में ₹3,541 करोड़ अधिक खर्च
  • ₹15,586 करोड़ को वीपीडीए में जमा किया गया
  • बजट अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन में गंभीर खामियां

मुंबई, 13 जुलाई 2026 – राज्य के मुख्य लेखा परीक्षक (CAG) ने महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख सामाजिक योजना ‘मुख्य मंत्री माझी लड़की बहिन योजना’ में वित्तीय अनियमितताओं की एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार, योजना के लिए अनुमोदित बजट ₹29,693.09 करोड़ के बावजूद, विभाग ने कुल ₹33,237.24 करोड़ खर्च किए, जिससे ₹3,541.16 करोड़ का अतिरिक्त खर्च हुआ।

पृष्ठभूमि और योजना का उद्देश्य

लड़की बहिन योजना, जिसे 28 जून 2024 को मंजूरी मिली, का लक्ष्य 21 से 65 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करना है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह ₹1,500 सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से दिया जाता है। यह पहल महिलाओं के कल्याण को सशक्त बनाने और पूंजी संपत्ति निर्माण के बजाय प्रत्यक्ष आय हस्तांतरण पर केंद्रित है।

ऑडिट के प्रमुख निष्कर्ष

CAG की 2024‑25 राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट ने तीन प्रमुख मुद्दों को उजागर किया: (i) बजट अनुमान में गंभीर त्रुटियाँ, (ii) खर्च नियंत्रण में लापरवाही, और (iii) वित्तीय प्रबंधन में अनुशासन की कमी। विशेष रूप से, जनवरी‑मार्च 2025 के बीच निकाले गए ₹15,586 करोड़ को वर्चुअल पर्सनल डिपॉज़िट अकाउंट्स (VPDAs) में जमा किया गया, जो “तत्काल खर्च की आवश्यकता नहीं” के कारण किया गया था। रिपोर्ट ने इसे “बजट अनुशासन और वित्तीय शुद्धता के विरुद्ध” कहा।

वित्तीय प्रभाव और संभावित परिणाम

वित्तीय डेटा से पता चलता है कि महिलाओं के कल्याण पर कुल खर्च पिछले वर्ष के ₹261.78 करोड़ से बढ़कर ₹33,500 करोड़ से अधिक हो गया, जो दर्शाता है कि योजना का फोकस सामाजिक कल्याण हस्तांतरण की ओर तेज़ी से शिफ्ट हो रहा है, न कि दीर्घकालिक पूंजी निर्माण की ओर। इस प्रकार की बढ़ोतरी यदि नियंत्रण में नहीं रखी गई तो राज्य की वित्तीय स्थिरता और सार्वजनिक निधियों की पारदर्शिता पर प्रश्न उठते हैं।

भविष्य की सिफ़ारिशें

CAG ने सुझाव दिया कि बड़े पैमाने के DBT योजनाओं के लिए बजट निर्माण के समय लाभार्थी कवरेज और निधि आवश्यकताओं का यथार्थवादी आकलन किया जाए, ताकि अनावश्यक अतिरिक्त मांगें या अनधिकृत खर्च से बचा जा सके। साथ ही, निधियों को VPDAs जैसे खातों में ‘पार्किंग’ करने के बजाय वास्तविक और तत्काल खर्च आवश्यकताओं से जोड़ा जाना चाहिए।