केरल सरकार ने सुधा पिलाई के अध्यक्षत्व में पाँच सदस्यीय समिति बनाकर KIIFB की मौजूदा संरचना की समीक्षा का आदेश दिया। तीन महीने के कार्यकाल में बोर्ड की वित्तीय, संचालनात्मक और नियामक पहलुओं का गहन विश्लेषण किया जाएगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सुधा पिलाई अध्यक्षता में 5‑सदस्यीय समिति बनायी गई
- समिति को KIIFB के ढाँचे, वित्तीय रणनीति और बुनियादी ढाँचा जांचना है
- कार्यकाल तीन महीने, परिणामों से दीर्घकालिक स्थिरता लक्ष्य
केरल सरकार ने 13 जुलाई को एक आदेश जारी किया जिसमें सुधा पिलाई, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, को प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया। यह समिति केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) की मौजूदा कार्यप्रणाली, संस्थागत ढाँचा और वित्तीय नीतियों की व्यापक समीक्षा करने के लिए गठित की गई है।
समिति के सदस्य और उनके प्रोफ़ाइल
पैनल में श्याम श्रीनिवासन (फ़ेडरल बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक), निलेश विकमसे (भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष), एच. शुब्हलक्ष्मी नारायणन (सेवानिवृत्त आईएएएस, पूर्व ऑडिट बोर्ड निदेशक) और तरुण बजाज (सेवानिवृत्त आईएएस, पूर्व राजस्व सचिव) शामिल हैं। इन विविध पृष्ठभूमियों से समिति को वित्तीय, कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोणों का समग्र मूल्यांकन करने की क्षमता मिलती है।
कार्यकाल और प्रमुख कार्य
समिति का कार्यकाल आदेश की तारीख से तीन महीने निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें KIIFB के मूल उद्देश्य, मौजूदा प्रोजेक्ट्स में हुए बदलाव, संस्थागत संरचना, संचालनात्मक दायित्व और उनके प्रभावों की जाँच करनी होगी। साथ ही, फंड के संसाधन जुटाने के तरीकों—जैसे उधारी उपकरण—की संवैधानिक, कानूनी, वित्तीय और ऑडिट मानकों के साथ अनुपालन का मूल्यांकन किया जाएगा।
संसाधन आवंटन और बुनियादी ढाँचा अंतराल
समिति यह भी देखेगी कि KIIFB के फंडों का उपयोग “महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा अंतराल” को पाटने में हुआ है या नहीं, तथा क्या फंड का वितरण जिलों और क्षेत्रों में समान रूप से हुआ है। यह विश्लेषण राज्य की विकास प्राथमिकताओं के साथ संरेखित होना चाहिए, ताकि आर्थिक असमानता को घटाया जा सके।
भविष्य की दिशा और संभावित परिणाम
समीक्षा के बाद समिति KIIFB के पुनर्गठन के लिए विस्तृत सिफ़ारिशें प्रस्तुत करेगी, जिसमें संस्थागत क्षमताओं का पुनःस्थापन, संभावित सहायक इकाइयों का पुनर्गठन या अलगाव, और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए नई वित्तीय मॉडल शामिल होंगी। वित्त विभाग ने इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक आंतरिक समन्वय एवं सचिवालय तंत्र भी स्थापित किया है, जिसका संचालन अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) करेंगे।
केरल की बुनियादी ढाँचा विकास योजना को तेज़ करने के लिए KIIFB एक महत्वपूर्ण वित्तीय पुल का काम करता आया है। इस व्यापक पुनरावलोकन के परिणाम न केवल फंड की पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करेंगे, बल्कि भविष्य में बड़े‑पैमाने पर प्रोजेक्ट्स के लिए निवेश आकर्षित करने की उसकी क्षमता को भी बढ़ाएंगे।