भारत और चीन ने विदेशी मुद्रा आरक्षित में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाते हुए यूएस ट्रेज़री की धारणा को घटाया है। यह बदलाव भू‑राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति के प्रति सुरक्षा की नई दिशा को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भारत ने यूएस ट्रेज़री परिसंपत्तियों में 22.5% कमी की।
- सोने की धारणाओं में 33.9% वृद्धि, अधिकांश घरेलू रूप में संग्रहीत।
- चीन भी यूएस ट्रेज़री में कमी कर रहा है, विविधीकरण की दिशा में।
पिछले वर्ष में भारत ने अपनी विदेशी मुद्रा आरक्षित में यूएस ट्रेज़री की हिस्सेदारी में 22.5% की तीव्र गिरावट देखी, जब 2025 अप्रैल में $232 बिलियन से घटकर 2026 अप्रैल में $181 बिलियन रह गया। इस गिरावट का मुख्य कारण सोने की धारणाओं में तेज़ी से वृद्धि है, जो अब विश्व की सबसे बड़ी आरक्षित परिसंपत्ति बन गई है।
सुनहरा पुनरुत्थान: भारत की सोने की रणनीति
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने पिछले छह वर्षों में सोने के भंडार को 658 मीट्रिक टन से बढ़ाकर लगभग 881 टन कर दिया, यानी 33.9% की उल्लेखनीय वृद्धि। इस प्रक्रिया में 2025‑2026 के बीच 100 टन से अधिक सोना विदेश से वापस लाया गया, जिससे कुल घरेलू सोने का प्रतिशत 38% से बढ़कर 77% तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू भंडारण सुरक्षा, लागत बचत और विदेशी कारकों से बचाव के कारण है।
चीन का समान कदम
भारत के साथ-साथ चीन भी यूएस ट्रेज़री में अपनी हिस्सेदारी घटा रहा है। 2025‑2026 के बीच चीन की यूएस ट्रेज़री रखी गई राशि $743.6 बिलियन से घटकर $651.1 बिलियन रह गई, यानी 12.44% की गिरावट। इस कटौती को जोखिम विविधीकरण और संभावित बाजार अस्थिरता के खिलाफ एक प्रावधान के रूप में देखा गया है।
भू‑राजनीतिक कारण और भविष्य की दिशा
रूसी‑युक्रेन संघर्ष ने दिखा दिया कि अमेरिकी सरकारी बांडों पर रखे हुए विदेशी आरक्षित को अचानक फ्रीज़ किया जा सकता है। इस अनुभव ने कई देशों को सोने जैसे सार्वभौमिक, गैर‑राष्ट्रीय संपत्ति की ओर आकर्षित किया। बैंक ऑफ़ बरौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनाविस ने कहा, “सोना किसी एक देश का नहीं होता, इसलिए यह विश्वसनीय सुरक्षा प्रदान करता है।” इस परिप्रेक्ष्य में, कई केंद्रीय बैंकों ने अपने पोर्टफ़ोलियो को विविधीकृत करने की नीति अपनाई है।
रुपए का अंतरराष्ट्रीयकरण और दीर्घकालिक प्रभाव
सोने के साथ-साथ भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रुपये को भी मजबूती देने के लिए व्यापार निपटान और मुद्रा समझौतों को बढ़ा रहा है। यह दोहरा कदम — सोने में निवेश और रुपये को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोग — देश को डॉलर‑निर्भरता कम करने और आर्थिक जोखिम को संतुलित करने में मदद करेगा।