रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने धूल-राख, कंटेनर, उर्वरक, पेट्रोलियम आदि क्षेत्रों में 8 प्रमुख सुधारों की घोषणा की, जिससे माल परिवहन की गति बढ़ेगी और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधरेगी। ये कदम “52 सुधार 52 हफ्ते” पहल के अंतर्गत कुल 17 सुधारों में गिने गए हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • धूल‑राख को बंद कंटेनर में ले जाने की नई व्यवस्था, जिससे प्रदूषण में कमी।
  • कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर (CTO) के लिए एकीकृत लाइसेंस प्रणाली, जिससे रूट चयन में लचीलापन।
  • वैन डिजाइन नीति में उद्योग‑मुख्य बदलाव, जिससे विशेष डिजाइन वाले वैन बन सकेंगे।

नई दिल्ली (14 जुलाई, 2026) – भारत के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को माल परिवहन को तेज़ और अधिक पर्यावरण‑सुरक्षित बनाने के लिए आठ व्यापक सुधारों की घोषणा की। इन सुधारों में धूल‑राख (फ़्लाई एश) का बंद कंटेनर में परिवहन, कंटेनर सेक्टर में एकीकृत लाइसेंस प्रणाली, उर्वरक का कंटेनर‑आधारित शिपमेंट, वैन डिजाइन में उद्योग‑सुगम नीति, पेट्रोलियम उत्पादों की नई वैन, और खाद्य‑अनाज, आटा एवं दालों के कंटेनर‑आधारित परिवहन शामिल हैं।

पृष्ठभूमि और आवश्यकता

वर्तमान में धूल‑राख को खुले वैन में ले जाया जाता है, जिससे रास्ते में धूल का विस्फोट और पर्यावरणीय क्षति होती है। सालाना उत्पन्न 4% धूल‑राख रेल द्वारा ही ले जाया जाता है, जबकि बाकी सड़कों पर ट्रकों द्वारा परिवहन होता है। इस नीति परिवर्तन से न केवल प्रदूषण घटेगा, बल्कि रेलवे की माल क्षमता भी बढ़ेगी। इसी प्रकार, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को अब विभिन्न रूटों के लिए अलग‑अलग लाइसेंस नहीं लेने पड़ेंगे, जिससे परिचालन लागत घटेगी और लीड‑टाइम कम होगा।

वैन डिजाइन में उद्योग‑मुख्य बदलाव

अब तक भारतीय रेलवे की वैन डिजाइन रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) के हाथ में थी, और केवल भारतीय रेलवे मानक (IRS) के घटकों का उपयोग संभव था। वैष्णव ने इस प्रक्रिया को सरल कर, निजी उद्योग को नई वैन डिज़ाइन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। प्रोटोटाइप का मूल्यांकन, परीक्षण और मंजूरी के बाद, पूरी रेक ट्रायल की सुविधा मिलेगी, जिससे विशेष उद्योग‑आधारित वैन जैसे पेट्रोलियम‑ओएल (POL) वैन जल्दी से लागू हो सकेंगे।

कौशल विकास और अनुबंध सुरक्षा

साथ ही, रेलवे प्रोजेक्ट्स में कुशल कारीगरों की आवश्यकता को देखते हुए एक नई स्किलिंग नीति पेश की गई है। इलेक्ट्रिशियन, फिट्टर, मस्न, प्लंबर आदि को प्रमाणित करने के बाद ही जटिल कार्य सौंपे जाएंगे, जिससे कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा। अनुबंधकों को अब परियोजना की शुरुआत में 10% प्रदर्शन सुरक्षा जमा करनी होगी, जो पहले चल रहे बिल से काटी जाती थी, इस कदम से अनुबंध पालन में कड़ाई आएगी।

रोलआउट और भविष्य की दिशा

इन आठ सुधारों के साथ “52 सुधार 52 हफ़्ते” अभियान के तहत अब तक 17 सुधारों का दायरा पूरा हो गया है। वैष्णव ने बताया कि आगे के हफ़्तों में भूमि अधिग्रहण को सुगम बनाने के लिए “रेलभूमि” पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जिससे भूमि संबंधी प्रक्रियाएँ डिजिटल और पारदर्शी होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम भारतीय रेलवे को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे की मजबूती के लिये निर्णायक साबित होंगे।