दो अमेरिकी छोटे व्यवसायों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 60 व्यापारिक भागीदारों पर लगाए गए नए टैरिफ के खिलाफ न्यूयॉर्क में मुकदमा दायर किया है। उनका तर्क है कि यह नीति राष्ट्रपति के कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करती है।

मुख्य बातें

  • दो अमेरिकी छोटे व्यवसायों ने ट्रंप के नए टैरिफ के खिलाफ न्यूयॉर्क ट्रेड कोर्ट में मुकदमा दायर किया है।
  • विवाद का मुख्य कारण 60 देशों पर 'जबरन श्रम' (forced labor) के आधार पर लगाए गए 10% और 12.5% के टैरिफ हैं।
  • वादी का तर्क है कि राष्ट्रपति के पास आयात पर कर लगाने की असीमित शक्ति नहीं है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में एक कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। दो छोटे व्यवसायों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टैरिफ नीति को चुनौती दी है, जो 60 विभिन्न व्यापारिक भागीदारों पर लागू की गई है। शुक्रवार को न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी व्यापार न्यायालय में दायर इस मुकदमे में कहा गया है कि ये नए टैरिफ कानूनी रूप से उचित नहीं हैं और राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।

ट्रंप प्रशासन ने यूरोपीय संघ सहित 60 देशों पर 10% से 12.5% तक के नए शुल्क लगाए हैं। प्रशासन का दावा है कि ये देश 'जबरन श्रम' के माध्यम से उत्पादित वस्तुओं के निर्यात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। हालांकि, व्यवसायों का कहना है कि इन आरोपों को साबित करने के लिए देश-विशिष्ट विस्तृत निष्कर्षों की आवश्यकता है, जो फिलहाल अनुपस्थित हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों की सीमा को परिभाषित करेगा। यदि अदालत इन टैरिफ को अवैध घोषित करती है, तो यह ट्रंप की विदेश नीति के सबसे बड़े हथियार—टैरिफ—को कमजोर कर सकता है।

टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता पैदा करता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकता है।

ऐतिहासिक रूप से, इन टैरिफ को 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत लगाया गया है। जबकि पिछले राष्ट्रपतियों ने इसका उपयोग किया है, विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का 'ब्रॉड-ब्रश' दृष्टिकोण, जो एक साथ इतने बड़े पैमाने पर देशों को निशाना बनाता है, इसका कोई ऐतिहासिक उदाहरण नहीं है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इससे पहले, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में यह फैसला सुनाया था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को एकतरफा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसके बाद ट्रंप ने अलग कानूनी आधारों का उपयोग करने की कोशिश की, जिन्हें अदालतों ने पहले भी अवैध माना है।

क्या आप जानते हैं?: धारा 301 का उपयोग मुख्य रूप से उन देशों के खिलाफ किया जाता है जो अनुचित या भेदभावपूर्ण आर्थिक प्रथाओं का पालन करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ट्रंप प्रशासन ने ये टैरिफ क्यों लगाए हैं?
प्रशासन का तर्क है कि कई देश जबरन श्रम (forced labor) से जुड़ी वस्तुओं के निर्यात को रोकने में विफल रहे हैं।

2. व्यवसायों की मुख्य आपत्ति क्या है?
व्यवसायों का कहना है कि राष्ट्रपति के पास बिना ठोस कानूनी आधार के इतने व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।