भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने ज़ोमैटो के प्लेटफ़ॉर्म शुल्क और डिलीवरी चार्ज को दुरुपयोग के आरोपों से मुक्त किया। शिकायत में अत्यधिक शुल्क और मूल्य भेदभाव का आरोप था, लेकिन आयोग ने कोई प्रारंभिक मामला नहीं पाया। इस फैसले का बाजार और उपभोक्ता पर दीर्घकालिक असर क्या होगा?
मुख्य बिंदु
- CCI ने ज़ोमैटो के शुल्क को दुरुपयोग का कोई प्रमाण नहीं पाया
- शिकायतकर्ता ने उच्च कीमतों और 645% प्लेटफ़ॉर्म शुल्क वृद्धि का हवाला दिया
- आयोग ने अंतरिम राहत को भी खारिज किया
CCI का निर्णय
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 24 जुलाई 2026 को Eternal Ltd. के खिलाफ दायर शिकायत को बंद कर दिया, जिसमें ज़ोमैटो के प्लेटफ़ॉर्म शुल्क और डिलीवरी चार्ज को दुरुपयोग के रूप में वर्गीकृत किया गया था। आयोग ने प्रारम्भिक जांच में पाया कि कंपनी के मूल्य निर्धारण प्रथा, जिसमें प्लेटफ़ॉर्म शुल्क, डिलीवरी चार्ज और मेन्यू मूल्य एवं ऐप मूल्य के अंतर शामिल हैं, 2002 के प्रतिस्पर्धा अधिनियम का उल्लंघन नहीं करतीं।
शिकायत की मुख्य बातें
शिकायतकर्ता आर. सुरेश ने दावा किया कि 13 अप्रैल 2026 को ज़ोमैटो के माध्यम से उन्होंने 123.50 रुपये की कीमत पर घी पोंगल का ऑर्डर दिया, लेकिन अंतिम बिल 198 रुपये तक पहुँच गया। इसमें 43 रुपये डिलीवरी चार्ज, 14.90 रुपये प्लेटफ़ॉर्म शुल्क और लागू GST शामिल थे। वही आइटम उन्होंने सीधे रेस्तरां से 105 रुपये में खरीदा। इस मूल्य अंतर को दुरुपयोग का प्रमाण माना गया।
CCI की प्रारम्भिक जांच
आयोग ने तय किया कि शिकायत में प्रस्तुत दस्तावेज़ों से कोई prima facie केस स्थापित नहीं होता। इसलिए, CCI ने सेक्शन 26(2) के तहत शिकायत को बंद कर दिया और अंतरिम राहत की मांग को भी खारिज किया। यह निर्णय इंगित करता है कि नियामक को विस्तृत सबूतों की आवश्यकता होती है, न कि केवल उपभोक्ता के व्यक्तिगत अनुभव से।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2002 का प्रतिस्पर्धा अधिनियम भारत में बाजार में प्रतिस्पर्धा को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया था। इसके तहत दुरुपयोग की परिभाषा में प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग, अनुचित मूल्य निर्धारण और अनन्य अनुबंध शामिल हैं। पिछले दशक में कई बड़े ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियों को इसी अधिनियम के तहत जांच का सामना करना पड़ा है, जिससे नियामक की भूमिका और अधिक स्पष्ट हुई है।
भविष्य के प्रभाव
CCI के इस निर्णय से ज़ोमैटो को तत्काल कानूनी जोखिम से राहत मिली है, लेकिन उपभोक्ताओं और रेस्तरां मालिकों के लिए पारदर्शी मूल्य निर्धारण की माँग बनी रहेगी। नियामक भविष्य में समान शिकायतों के लिए अधिक सख्त दस्तावेज़ीकरण की अपेक्षा कर सकता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the dismissal reinforces the importance of rigorous evidence in competition cases, signaling to other platform players that mere price differentials without solid proof may not attract regulatory action.
"उपभोक्ता संरक्षण और प्रतिस्पर्धा को संतुलित करने के लिए नियामक को ठोस डेटा की जरूरत होती है," डॉ. अनीता सिंह, एंटी-ट्रस्ट विशेषज्ञ ने कहा।
Frequently Asked Questions
- क्या ज़ोमैटो को अब भी प्लेटफ़ॉर्म शुल्क लेना जारी रखने की अनुमति है? हाँ, जब तक कि इन शुल्कों को प्रतिस्पर्धा अधिनियम के दायरे में गैर-भेदभावात्मक माना जाता है।
- अगर भविष्य में समान शिकायतें आती हैं तो क्या होगा? आयोग प्रारम्भिक जांच करेगा और यदि prima facie केस स्थापित होता है तो विस्तृत जांच को आदेश देगा।