सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की उर्वरक आयात निर्भरता वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 34.5% हो गई है। रूस, ओमान और सऊदी अरब जैसे देश अभी भी भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं।

मुख्य बातें

  • भारत की उर्वरक आयात निर्भरता FY25 के 24.4% से बढ़कर FY26 में 34.5% हो गई है।
  • रूस, ओमान और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े उर्वरक आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं।
  • आयात पर बढ़ती निर्भरता खाद्य सुरक्षा और कीमतों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

हालिया सरकारी आंकड़ों ने भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। भारत की उर्वरक आयात निर्भरता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो अब वित्त वर्ष 2026 (FY26) में बढ़कर 34.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह पिछले वित्त वर्ष (FY25) के 24.4 प्रतिशत के मुकाबले एक बड़ा उछाल है।

ऐतिहासिक रूप से, भारत ने अपनी कृषि जरूरतों के लिए वैश्विक बाजार पर काफी हद तक भरोसा किया है। वित्त वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत था, जिसका अर्थ है कि पिछले कुछ वर्षों में आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता और घरेलू उत्पादन की सीमाओं के कारण आयात पर भार बढ़ा है। वर्तमान में, रूस, ओमान और सऊदी अरब जैसे देश भारत के लिए उर्वरक आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बने हुए हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि उर्वरक आयात पर बढ़ती यह निर्भरता भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए एक रणनीतिक जोखिम है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान सीधे तौर पर भारतीय किसानों की लागत और देश में खाद्य मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकते हैं। यदि वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है, तो इसका सीधा असर छोटे और सीमांत किसानों की जेब पर पड़ेगा।

उर्वरक आयात में वृद्धि केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि की आत्मनिर्भरता पर एक सवालिया निशान है।

ऐतिहासिक तुलना

वित्त वर्ष (FY)आयात निर्भरता (%)
FY2332%
FY2524.4%
FY26 (अनुमानित/वर्तमान)34.5%
क्या आप जानते हैं?: उर्वरक की कीमतों में मामूली वैश्विक वृद्धि भी भारत में सब्जियों और अनाज की कीमतों को तेजी से बढ़ा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. भारत किन देशों से सबसे अधिक उर्वरक आयात करता है?
भारत मुख्य रूप से रूस, ओमान और सऊदी अरब से उर्वरक आयात करता है।

2. आयात बढ़ने से किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
आयात बढ़ने से वैश्विक कीमतों पर निर्भरता बढ़ेगी, जिससे उर्वरक की लागत बढ़ सकती है और किसानों का मुनाफा कम हो सकता है।