भारत के प्रतिभूति नियामक सेबी ने सेक्यूरिटीज़ लेंडिंग एंड बोर्रोइंग (एसएलबी) योजना का व्यापक सुधार, सेटु पोर्टल का लॉन्च और कॉरपोरेट बॉन्ड की ब्लॉकचेन‑आधारित टोकनाइजेशन पायलट की घोषणा की। इन पहलों का उद्देश्य कीमत खोज, तरलता और कैश‑डेरिवेटिव्स बाजारों में अनुपालन को सरल बनाना है।
मुख्य बिंदु
- सेबी ने एसएलबी स्कीम को आधुनिक बनाने की योजना बनाई।
- सेटु पोर्टल के माध्यम से मध्यस्थों की डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया आसान होगी।
- कॉरपोरेट बॉन्ड की ब्लॉकचेन टोकनाइजेशन के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया।
सेबी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि मौजूदा सेक्यूरिटीज़ लेंडिंग एंड बोर्रोइंग (एसएलबी) योजना को पुनर्गठित किया जाएगा ताकि कीमत खोज को बेहतर बनाया जा सके और कैश व डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स के बीच सहज लिंक स्थापित हो। यह सुधार शॉर्ट‑सेलिंग, बाजार की तरलता और कुशल मूल्य निर्धारण को सुदृढ़ करेगा।
नया सेटु पोर्टल एक ऑनलाइन मंच होगा जहाँ सेबी‑नियंत्रित मध्यस्थ पंजीकरण, आवेदन फाइलिंग, शुल्क भुगतान और नियामक अनुपालन कार्यों को डिजिटल रूप से पूरा करेंगे। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति दोनों में वृद्धि होगी।
सेबी ने ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित कॉरपोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन पायलट की घोषणा की। टोकनाइजेशन से बॉन्ड के स्वामित्व या अधिकारों को डिजिटल टोकन के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे जारी, ट्रेड और प्रबंधन इलेक्ट्रॉनिक रूप से संभव होगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia analysis shows that SEBI’s tech‑driven reforms could set a global benchmark for emerging market regulators, attracting foreign investors seeking transparent and efficient capital markets.
“डिजिटल टोकनाइजेशन से भारतीय बॉन्ड बाजार में तरलता में अभूतपूर्व वृद्धि की संभावना है,” कहा वित्त विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एसएलबी स्कीम का पुनर्गठन कब लागू होगा? सेबी ने कहा है कि नई नियमावली 2027 के वित्तीय वर्ष की शुरुआत में प्रभावी होगी।
टोकनाइजेशन पायलट का दायरा क्या है? यह पायलट प्रमुख भारतीय कंपनियों के 5‑सेक्टर बॉन्ड्स को शामिल करेगा, कुल मिलाकर लगभग ₹10,000 करोड़ मूल्य के।