कभी 'केरल के मैनचेस्टर' के रूप में प्रसिद्ध कन्नूर का हथकरघा क्षेत्र आज वेतन में देरी, वित्तीय घाटे और श्रमिकों की कमी से जूझ रहा है। सरकारी योजनाओं की विफलता और पावरलूम की प्रतिस्पर्धा ने इस पारंपरिक उद्योग को अस्तित्व की लड़ाई में धकेल दिया है।
मुख्य बातें
- कन्नूर का हथकरघा क्षेत्र वेतन में देरी और बढ़ते वित्तीय घाटे का सामना कर रहा है।
- श्रमिकों की संख्या 30,000 से घटकर मात्र 18,000 रह गई है।
- सरकारी स्कूल यूनिफॉर्म योजना के भुगतान में देरी से सहकारी समितियां संकट में हैं।
- पावरलूम की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कच्चे माल की बढ़ती लागत ने संकट को गहरा किया है।
कन्नूर, केरल: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर, जहाँ उत्सव का माहौल होना चाहिए था, कन्नूर के बुनाई शेड में सन्नाटा पसरा हुआ है। जो क्षेत्र कभी 'केरल के मैनचेस्टर' के रूप में जाना जाता था और राज्य की हथकरघा परंपरा का केंद्र था, वह आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।
सिस्टम की विफलता और गहराता आर्थिक संकट
हथकरघा बुनकर समाज संघ के संयुक्त सचिव टी.वी. संतोष के अनुसार, समस्या हथकरघा के भविष्य की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की है जो बुनकरों को सहारा देने में विफल रही है। सरकारी स्कूल यूनिफॉर्म योजना, जिसे बुनकरों को रोजगार देने के लिए शुरू किया गया था, अब उनके लिए सबसे बड़ा वित्तीय बोझ बन गई है। कन्नूर में केवल स्कूल यूनिफॉर्म उत्पादन के लिए लगभग ₹8.5 करोड़ का वेतन बकाया है, और लगभग 3,000 श्रमिक पिछले आठ महीनों से बिना वेतन के काम कर रहे हैं।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जब तक संरचनात्मक सुधार नहीं किए जाते, तब तक यह उद्योग केवल एक 'विरासत' बनकर रह जाएगा, न कि आजीविका का साधन। सरकारी खरीद दरें 2019 के पुराने आंकड़ों पर आधारित हैं, जबकि कच्चे माल की लागत और महंगाई भत्ता काफी बढ़ चुका है।
बुनकर बिना समय पर आय के जीवित नहीं रह सकते; कई लोग पहले ही इस पेशे को छोड़ चुके हैं।
श्रमिकों की घटती संख्या और सहकारी समितियों का पतन:
इस संकट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। केरल में हथकरघा श्रमिकों की संख्या जो कभी 25,000-30,000 थी, अब घटकर केवल 18,000 रह गई है। इसी तरह, सहकारी समितियों की संख्या भी 600 से गिरकर 450 पर आ गई है।
| विशेषता | हथकरघा (Handloom) | पावरलूम (Powerloom) |
|---|---|---|
| दैनिक उत्पादन | 6-7 मीटर | 35-40 मीटर |
| लागत/गति | अधिक समय, उच्च लागत | तेज और किफायती |
| बाजार स्थिति | प्रीमियम क्राफ्ट | मास प्रोडक्शन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. कन्नूर के हथकरघा उद्योग के पतन का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारणों में वेतन में देरी, कच्चे माल की बढ़ती लागत, GST का बोझ और पावरलूम से कड़ी प्रतिस्पर्धा शामिल है।
2. क्या हथकरघा का भविष्य है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे मास प्रोडक्शन के बजाय एक 'प्रीमियम क्राफ्ट' के रूप में पेश किया जाए, तो इसका भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।