RBI ने पिछले हफ़्ते ब्याज दरें स्थिर रखी, लेकिन कोर महंगाई पर ज़ोर देने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि केंद्रीय बैंक अब हेडलाइन CPI से अधिक ‘कोर‑कोर’ महंगाई को लक्ष्य बना रहा है।
मुख्य बिंदु
- RBI ने 5.25% पर रेपो दर को स्थिर रखा
- कोर महंगाई (भोजन, ईंधन, कीमती धातुएँ हटाकर) पर नई फोकस
- आर्थिक विशेषज्ञों को नीति‑निर्देशन में अस्पष्टता महसूस
पिछले हफ़्ते RBI ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो दर को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा, जो बाजार की अपेक्षा के अनुरूप था। लेकिन घोषणा के बाद कम‑आधार मूल्य दबावों पर ज़्यादा जोर देने से कई अर्थशास्त्री भ्रमित हो गए हैं।
कोर महंगाई की नई परिभाषा
भविष्यवाणी के अनुसार, RBI ने 4% के लक्ष्य को बरकरार रखा है, पर अब यह संकेत दे रहा है कि वह कोर महंगाई—जिसमें भोजन, ईंधन और कीमती धातुओं को बाहर रखा गया है—पर अधिक ध्यान देगा। जून में हेडलाइन CPI 4.38% तक बढ़ी, जबकि कोर महंगाई 3.9% पर स्थिर रही। कीमती धातुओं को हटाकर कोर महंगाई केवल 2.5% रही।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पहले भी RBI ने हेडलाइन महंगाई के बजाय कोर महंगाई को नीति‑निर्धारण का आधार माना है। 2022‑23 में भी RBI ने कोर‑कोर महंगाई को ‘सुपर कोर’ कहा था, जिससे यह स्पष्ट हो कि कीमतों की अस्थिरता को कम करने हेतु बुनियादी माँग‑साइड विश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a shift towards core‑core inflation signals a more dovish stance, potentially delaying rate hikes despite rising headline inflation. This could affect borrowing costs for corporations and households alike, reshaping investment strategies across sectors.
"यदि RBI कोर महंगाई को प्राथमिकता देता रहेगा, तो वास्तविक मुद्रास्फीति दबावों को समझना निवेशकों के लिए अत्यावश्यक होगा," कहा एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या RBI की यह नीति भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि का संकेत देगी?
उत्तर: विशेषज्ञ मानते हैं कि जब कोर‑कोर महंगाई 4% के निकट पहुँचेगी, तब नीति‑समायोजन की संभावना बढ़ेगी।
प्रश्न 2: कोर महंगाई में कीमती धातुओं को बाहर करने का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: सोना‑चाँदी जैसी धातुओं की कीमतें अत्यधिक अस्थिर होती हैं, इसलिए उन्हें हटाकर अधिक स्थिर मूल्य संकेतक प्राप्त किया जाता है।