भारत में 82 % महिलाएँ अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं। AI को यदि लैंगिक‑सेंसिटिव रूप से निर्मित किया गया तो यह समावेशी आर्थिक विकास को गति दे सकता है, अन्यथा मौजूदा असमानताओं को बढ़ा सकता है।
मुख्य बिंदु
- AI की डिज़ाइन और भाषा चयन महिला श्रमिकों की भागीदारी को तय करेगा।
- लिंग‑प्रभाव मूल्यांकन और AI साक्षरता सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे में आवश्यक हैं।
- डिजिटल सुरक्षा के बिना आर्थिक समावेशन असंभव है।
AI और भारत की अनौपचारिक महिला श्रमिक
भारत की विकसित भारत 2047 योजना इस बात पर निर्भर करती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा उत्पन्न उत्पादकता लाभ व्यापक रूप से साझा हों या केवल विशेष वर्गों तक सीमित रहें। कृषि, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं में AI के बदलावों ने मूल्य शृंखलाओं को पुनःपरिभाषित किया है।
2018 के ILO रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कार्यरत महिलाओं में से लगभग 82 % अनौपचारिक रोजगार में हैं – कृषि, घर‑आधारित उत्पादन, घरेलू सेवाएँ और माइक्रो‑उद्यम शामिल हैं। इस संदर्भ में AI को लैंगिक‑संसोधित बनाना विकास का अवसर है, न कि जोखिम।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दो दशकों में भारत ने AI बुनियादी ढाँचा स्थापित किया है – भारतAI मिशन, बहुभाषी प्लेटफ़ॉर्म BHASHINI, और 2025 में जारी AI गवर्नेंस गाइडलाइन। हालांकि, इन पहलों का अधिकांश लाभ शहरी, तकनीकी‑साक्षर जनसंख्या को मिला है, जबकि अनौपचारिक महिला श्रमिकों तक पहुँच अभी भी सीमित है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यदि AI समाधान महिला श्रमिकों की भाषा, भूमि‑पहुँच और गतिशीलता बाधाओं को ध्यान में रखकर डिज़ाइन नहीं किए गए, तो डिजिटल असमानता और आर्थिक असमानता दोनों ही गहरी होंगी।
"AI को तभी सामाजिक परिवर्तन की शक्ति मिल सकती है जब वह महिलाओं की वास्तविक जीवन स्थितियों को समझे और उनके लिए उपयुक्त समाधान प्रदान करे," Dr. अनन्या राव, AI नीति विशेषज्ञ ने कहा।
शासन और नीति‑प्राथमिकताएँ
लिंग‑प्रभाव मूल्यांकन को AI गवर्नेंस गाइडलाइन के ‘न्याय और समानता’ सिद्धांत के साथ लागू किया जाना चाहिए। यह जांचेगा कि AI‑आधारित क्रेडिट, रोजगार या कल्याण निर्णय लिंग, जाति, विकलांगता और कार्य स्थिति के आधार पर कैसे भिन्न होते हैं।
AI साक्षरता को सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे में शामिल करना अनिवार्य है। DAY‑NRLM, DDU‑GKY, स्किल इंडिया और मिशन शक्ति के सखी नेटवर्क के माध्यम से महिलाओं को समय‑समान, साक्षरता‑अनुकूल प्रशिक्षण देना चाहिए। सफलता का मापदंड यह होना चाहिए कि महिलाओं को अधिकार प्राप्त करने, प्लेटफ़ॉर्म नेविगेट करने या बेहतर वेतन वाली नौकरियों में स्थानांतरित होने में मदद मिली या नहीं।
डिजिटल सुरक्षा को आर्थिक भागीदारी की शर्त बनाना होगा। गहरी‑नकली (deepfake) वीडियो, ऑनलाइन उत्पीड़न और गैर‑सहमति वाली छवियों के खिलाफ IT (संशोधन) नियम, 2021 और MeitY की AI‑जनित सामग्री लेबलिंग नीति को प्रभावी बनाना आवश्यक है।
Frequently Asked Questions
- AI अनौपचारिक महिला श्रमिकों को कैसे लाभ पहुँचा सकता है? भाषा‑अनुकूल, स्थानीयकृत सलाह, बाजार‑पहुँच और वित्तीय सेवाओं के माध्यम से उत्पादकता और आय में वृद्धि संभव है।
- सरकार कौन से कदम उठा रही है? AI गवर्नेंस गाइडलाइन, बहुभाषी प्लेटफ़ॉर्म BHASHINI, और विभिन्न कौशल‑विकास मिशनों के साथ AI साक्षरता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।