केरल पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे बढ़ते साइबर खतरों से निपटने के लिए सार्वजनिक और निजी बैंकों के साथ मिलकर एक नई संयुक्त कार्य योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय धोखाधड़ी की जांच में तेजी लाना और पीड़ितों के पैसे वापस दिलाना है।

मुख्य बातें

  • केरल पुलिस और बैंकों के बीच एक 'संयुक्त साइबर समिति' का गठन किया जाएगा।
  • 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे नए जमाने के स्कैम्स पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • 'ऑपरेशन Cy-Hunt' के माध्यम से अब तक ₹78 करोड़ के लेनदेन को ब्लॉक किया जा चुका है।
  • एर्नाकुलम और मलप्पुरम में 'म्यूल अकाउंट्स' के बढ़ते चलन की पहचान की गई है।

केरल के राज्य पुलिस प्रमुख (SPC) रवाडा ए. चंद्रशेखर ने राज्य में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में, पुलिस अधिकारियों और विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों ने साइबर अपराधों के खिलाफ एक समन्वित रणनीति तैयार की है।

इस नई योजना के तहत, केरल पुलिस और बैंकों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त साइबर समिति (Joint Cyber Committee) बनाई जाएगी। यह समिति साइबर अपराधों की निगरानी करेगी, शिकायतों की जांच करेगी और जांच की गति और दक्षता में सुधार करने के लिए बैंकों के साथ मिलकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि साइबर अपराधी अब 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे परिष्कृत तरीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे आम नागरिक आसानी से शिकार बन रहे हैं। पुलिस और बैंकों के बीच यह सीधा समन्वय अपराधियों के लिए धन हस्तांतरण के रास्ते बंद कर देगा। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्य साइबर डिवीजन इन सभी उपायों को लागू करेगा।

साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए बैंकों के साथ रियल-टाइम डेटा साझा करना ही एकमात्र प्रभावी समाधान है।

पुलिस ने साइबर अपराधों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक समर्पित 24-घंटे कॉल सेंटर भी शुरू किया है। इसके अलावा, 'ऑपरेशन Cy-Hunt' के माध्यम से पुलिस सक्रिय रूप से उन 'म्यूल अकाउंट्स' (फर्जी खातों) को ट्रैक कर रही है जिनका उपयोग अवैध धन प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

हाल के वर्षों में, केरल के एर्नाकुलम और मलप्पुरम जैसे जिले साइबर धोखाधड़ी के हॉटस्पॉट के रूप में उभरे हैं। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग ₹78 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन को ब्लॉक किया गया है, जिसमें से लगभग 5% राशि सफलतापूर्वक मूल खातों में वापस कर दी गई है।

क्या आप जानते हैं?: 'म्यूल अकाउंट' वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग अपराधी अपने अवैध धन को छिपाने और स्थानांतरित करने के लिए करते हैं, अक्सर किसी निर्दोष व्यक्ति के नाम पर।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम क्या है?
यह एक प्रकार की धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस या जांच एजेंसी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल के माध्यम से डराते हैं और उन्हें 'गिरफ्तारी' के नाम पर पैसे ऐंठते हैं।

2. केरल पुलिस ने अब तक कितनी राशि रिकवर की है?
पुलिस ने ₹78 करोड़ के लेनदेन को ब्लॉक किया है, जिसमें से लगभग 5% राशि पीड़ितों को वापस मिल चुकी है।