कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती मामले में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बीच, सरकार ने दो FIR को CID को सौंप दिया है। इस घोटाले में ₹80 लाख तक की रिश्वत के लेनदेन का मामला सामने आया है।

मुख्य बातें

  • KPSC पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती मामले की जांच अब CID करेगी।
  • दो बिचौलियों, सिकंदर चौधरी और आरिफ मोहम्मद मुल्ला को गिरफ्तार किया गया है।
  • आरोप है कि ₹80 लाख में सरकारी नौकरी दिलाने का वादा किया गया था।
  • जांचकर्ताओं को KPSC के भीतर मिलीभगत का संदेह है।

बेंगलुरु: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में व्याप्त कथित अनियमितताओं के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। विपक्षी नेताओं द्वारा CBI जांच की मांग के बाद, कर्नाटक सरकार ने इस मामले से जुड़ी दो महत्वपूर्ण FIR को अपराध जांच विभाग (CID) को स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।

यह मामला तब सामने आया जब यह आरोप लगे कि एक पशु चिकित्सा अधिकारी के पद के लिए ₹80 लाख तक की मांग की जा रही थी। पुलिस ने इस मामले में दो प्रमुख बिचौलियों को गिरफ्तार किया है: विजयपुरा के एक हेडमास्टर सिकंदर चौधरी (46) और बागलकोट जिले के जमाखंडी के आरिफ मोहम्मद मुल्ला (45)। इन दोनों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि भर्ती घोटाले के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि KPSC के भीतर के कर्मचारी इस घोटाले में शामिल पाए जाते हैं, तो यह पूरे प्रशासनिक ढांचे को हिला कर रख सकता है।

जांच में शामिल अधिकारियों का मानना है कि बिचौलियों ने KPSC के नाम का दुरुपयोग कर उम्मीदवारों को ठगा है।

जांच के दौरान, पुलिस को एक ऑडियो क्लिप भी मिली है जिसमें आरिफ कथित तौर पर ₹80 लाख में नौकरी दिलाने की बात कर रहा है। पुलिस अब इस ऑडियो की फोरेंसिक जांच के लिए आरिफ के वॉइस सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। इसके अलावा, जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या KPSC के किसी वर्तमान अधिकारी ने इस धोखाधड़ी में मदद की थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

KPSC पिछले कुछ समय से विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद के आरोपों से घिरा रहा है। हाल ही में आयोग के अध्यक्ष की बेटी से जुड़े एक मामले ने भी विवादों को जन्म दिया है, जिससे सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है।

क्या आप जानते हैं?: सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मामलों में CID और CBI की जांच अक्सर बड़े नेटवर्क का खुलासा करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. CID को मामले क्यों सौंपा गया?
मामले की गंभीरता और भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क की संभावना को देखते हुए, सरकार ने गहन जांच के लिए इसे CID को स्थानांतरित किया है।

2. गिरफ्तार किए गए बिचौलिये कौन हैं?
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में विजयपुरा के एक हेडमास्टर और बागलकोट के एक निवासी शामिल हैं, जिन पर ₹80 लाख के घोटाले का आरोप है।