अंधवेब पर मिलें 1.2 टेराबाइट डेटा के बड़े कैश से, जिसमें 18,997 फ़ाइलें कुडंकुलम नाभिकीय शक्ति स्टेशन से जुड़ी हैं। यह लीक रिलायंस ग्रुप और पहले की साइबर‑हमलों के संदर्भ में सुरक्षा एवं पारदर्शिता के सवाल उठाती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • अंधवेब पर 14.3 GB डेटा, 18,997 फ़ाइलें कुडंकुलम नाभिकीय स्टेशन से जुड़ी।
  • डेटा रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के EPC अनुबंध से संबंधित, लेकिन परमाणु सुरक्षा से नहीं।
  • पहले 2019 में उत्तर कोरियाई मैलवेयर ने स्टेशन को लक्षित किया, अब नए लीक से सुरक्षा चिंताएँ बढ़ी।

नई दिल्ली (17 जुलाई 2026) – एक रैनसमवेयर समूह World Leaks द्वारा अंधवेब पर प्रकाशित डेटा सेट ने भारत के प्रमुख नाभिकीय परियोजनाओं में से एक, कुडंकुलम नाभिकीय शक्ति स्टेशन (KKNPP) को फिर से प्रकाश में ला दिया है। इस डेटा सेट में 14.3 GB की 18,997 फ़ाइलें शामिल हैं, जो मुख्यतः स्टेशन के गैर‑न्यूक्लियर “बैलेंस ऑफ़ प्लांट” (BoP) सुविधाओं से संबंधित हैं।

डेटा का स्रोत और मौजूदा विवाद

क्लेम किया गया है कि ये फ़ाइलें 1.2 टेराबाइट के बड़े कैश का हिस्सा हैं, जिसमें 858,000 से अधिक दस्तावेज़ शामिल हैं और यह सब अनील अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप से जुड़ा माना जा रहा है। 2018 में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को KKNPP के BoP के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) अनुबंध मिला था। लीक में टेंडर दस्तावेज़, वित्तीय इनवॉइस, इंजीनियरिंग ड्रॉइंग, मीटिंग मिनट्स और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर व NPCIL के बीच की पत्राचार शामिल हैं।

रिलायंस ग्रुप और Yotta की प्रतिक्रिया

रिलायंस ग्रुप ने बताया कि उनके डेटा में “आंशिक उल्लंघन” हुआ था, जो एक तृतीय‑पक्ष डेटा सेंटर सेवा प्रदाता Yotta द्वारा होस्ट किए गए सर्वर पर हुआ। Yotta ने कहा कि 29 मई को संदेहास्पद गतिविधि की पहचान की गई, उसे तुरंत रोक दिया गया और रैनसमवेयर के निष्पादन को रोका गया। सरकारी एजेंसियों को इस घटना की सूचना दे दी गई है।

पूर्व साइबर‑हमले और सुरक्षा पर प्रभाव

यह पहली बार नहीं है जब कुडंकुलम स्टेशन साइबर‑हमले का शिकार हुआ है। 2019 में उत्तर कोरियाई हैकर समूह द्वारा विकसित “DTrack” मैलवेयर ने स्टेशन के प्रशासनिक नेटवर्क को प्रभावित किया था। उस समय राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (NCCC) ने चेतावनी जारी की थी और प्रभावित सिस्टम को मुख्य नेटवर्क से अलग कर दिया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य डेटा चोरी, प्रौद्योगिकी जासूसी और रीकॉनिसेंस था।

भविष्य की दिशा और संभावित निहितार्थ

कुडंकुलम स्टेशन, तमिलनाडु के तिरुनेल्वेली जिले में स्थित, छह VVER‑डिज़ाइन वाले प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टरों से बना है, जिसमें दो यूनिट पहले ही चालू हैं, जबकि यूनिट‑3 और 4 2027 तक कार्यरत होने की उम्मीद है। डेटा लीक से यह स्पष्ट होता है कि नॉन‑न्यूक्लियर सुविधाओं के दस्तावेज़ भी गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकते हैं, विशेषकर जब वे बड़े ठेकेदारों के साथ जुड़ते हैं। इस लीक से नीतियों में पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने और संभावित विदेशी जासूसी के प्रति सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है।