स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर भारत की स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन ने 21 तोपों की सलामी देकर सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया। 'ऑपरेशन सिंदूर' में अपनी शक्ति सिद्ध कर चुकी ये तोपें अब देश की सुरक्षा का नया चेहरा हैं।
मुख्य बातें
- स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन (LFG) ने स्वतंत्रता दिवस पर 21 तोपों की सलामी दी।
- ये तोपें 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को नष्ट करने में सफल रही थीं।
- 8 तोपों की बैटरी ने मात्र 52 सेकंड में 21 गोले दागकर सटीक समन्वय का प्रदर्शन किया।
- ब्रिटिश काल की 25-पाउंडर गन की जगह अब पूरी तरह स्वदेशी तकनीक ने ले ली है।
नई दिल्ली: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर लाल किले की प्राचीर से एक नया इतिहास रचा गया। इस वर्ष की 21 तोपों की सलामी के लिए पारंपरिक ब्रिटिश काल की 25-पाउंडर गन के बजाय पूरी तरह से स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन (LFG) का उपयोग किया गया। यह क्षण न केवल सैन्य सम्मान का था, बल्कि भारत की रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता का भी एक सशक्त प्रमाण था।
यह गौरवशाली क्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये तोपें युद्ध के मैदान में अपनी वीरता सिद्ध कर चुकी हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान, जो मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था, इन तोपों ने पाकिस्तान और PoK में स्थित आतंकी कैंपों पर सटीक प्रहार कर दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं है बल्कि रणनीतिक है। औपनिवेशिक काल के हथियारों को हटाकर स्वदेशी तकनीक को अपनाना भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' नीति की सफलता को दर्शाता है। इससे न केवल विदेशी निर्भरता कम होती है, बल्कि भारतीय रक्षा उत्पादन (Defense Production) को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलती है।
स्वदेशी तोपखाने का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि भारत अब केवल रक्षा सामग्री का खरीदार नहीं, बल्कि एक सक्षम निर्माता बन चुका है।
105mm लाइट फील्ड गन: तकनीकी क्षमता
ऑर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड द्वारा विकसित यह तोप आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मारक क्षमता (Range) | 17.2 किलोमीटर |
| फायरिंग रेट | 6 राउंड प्रति मिनट |
| वजन | पुरानी गन से 1000 किलोग्राम कम (अधिक मोबाइल) |
| उत्पादक | ऑर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड (OFB) |
इस समारोह के दौरान 8 तोपों की एक विशेष 'सेरेमोनियल बैटरी' ने राष्ट्रगान के साथ तालमेल बिठाते हुए मात्र 52 सेकंड में 21 गोले दागे। इस प्रकार के सटीक समन्वय के लिए अत्यधिक प्रशिक्षण और तकनीकी सटीकता की आवश्यकता होती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में 21 तोपों की सलामी की परंपरा राष्ट्रीय महत्व के अवसरों पर सैन्य सम्मान देने के लिए निभाई जाती है। लंबे समय तक इसके लिए ब्रिटिश काल के हथियारों का उपयोग होता रहा, लेकिन अब भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को पूरी तरह से स्वदेशीकरण की ओर मोड़ दिया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
उत्तर: यह मई 2025 में पहलगाम हमले के जवाब में भारत द्वारा पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर किया गया एक सफल सैन्य अभियान था।
प्रश्न 2: ये तोपें कितनी दूर तक मार कर सकती हैं?
उत्तर: स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन की मारक क्षमता 17.2 किलोमीटर है।