केंद्र सरकार ने अपतटीय तेल और गैस अन्वेषण को बढ़ावा देने के लिए 'समुद्र मंथन' योजना के तहत ₹84,084 करोड़ के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी है। इस योजना का लक्ष्य गहरे समुद्र में 60 नए कुएं खोदना और देश के ऊर्जा भंडार को मजबूत करना है।
मुख्य बातें
- 'समुद्र मंथन' योजना के लिए कुल ₹84,084 करोड़ का आवंटन।
- गहरे पानी में 60 अन्वेषण कुएं खोदने के लिए ₹43,200 करोड़ आवंटित।
- लक्ष्य: 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल समकक्ष (MMTOE) भंडार को उत्प्रेरित करना।
- योजना का कार्यकाल वित्त वर्ष 2030-31 तक रहेगा।
भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को पेट्रोलियम मंत्रालय की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना, जिसे 'समुद्र मंथन' नाम दिया गया है, के लिए ₹84,084 करोड़ के परिव्यय को मंजूरी दे दी है। यह योजना वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी और इसका मुख्य उद्देश्य भारत के अपतटीय तेल और गैस भंडार को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना है।
योजना का विस्तृत वर्गीकरण
इस विशाल बजट को चार प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया गया है, जो अन्वेषण से लेकर बुनियादी ढांचे के विकास तक फैले हुए हैं:
- गहरा अन्वेषण: 60 गहरे पानी के अन्वेषण कुएं खोदने के लिए ₹43,200 करोड़ आवंटित किए गए हैं। सरकार प्रति कुआं ₹675 करोड़ तक या पात्र ड्रिलिंग लागत का 50% तक सहायता प्रदान करेगी।
- डेटा अधिग्रहण: अपतटीय डेटा अधिग्रहण के लिए ₹28,534 करोड़ का प्रावधान है।
- बुनियादी ढांचा: खोजों के व्यावसायीकरण को सुगम बनाने के लिए सामान्य अपतटीय बुनियादी ढांचा केंद्रों के विकास हेतु ₹10,000 करोड़।
- विनिर्माण क्षेत्र: घरेलू विनिर्माण और महत्वपूर्ण उपकरणों के स्थानीयकरण को बढ़ावा देने के लिए ₹2,000 करोड़।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के मौजूदा तेल और गैस क्षेत्र धीरे-धीरे बूढ़े हो रहे हैं, जिससे उत्पादन में गिरावट का खतरा है। 'समुद्र मंथन' जैसी योजनाएं इस जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक हैं। गहरे समुद्र में अन्वेषण करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण और पूंजी प्रधान है, लेकिन यह देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।
गहरे और अति-गहरे पानी में बड़े पैमाने पर भूकंपीय डेटा अधिग्रहण और अन्वेषण कुओं की ड्रिलिंग भूगर्भीय अनिश्चितता को कम करेगी और भविष्य की खोजों की नींव रखेगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत लंबे समय से कच्चे तेल के लिए आयात पर निर्भर रहा है। पिछले कुछ दशकों में, अन्वेषण के प्रयासों ने घरेलू उत्पादन को बनाए रखने में मदद की है, लेकिन अब गहरे पानी (Deepwater) के संसाधनों तक पहुंचना भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
Frequently Asked Questions
1. 'समुद्र मंथन' योजना का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इसका मुख्य लक्ष्य भारत के अपतटीय तेल और गैस भंडार को 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल समकक्ष (MMTOE) तक बढ़ाने के लिए निवेश और नवाचार को बढ़ावा देना है।
2. सरकार ड्रिलिंग के लिए कितनी मदद करेगी?
सरकार प्रति कुआं ₹675 करोड़ तक या पात्र ड्रिलिंग लागत का 50% हिस्सा वहन करने की योजना बना रही है।