असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगु ने बताया कि 44,243 सरकारी एवं सहायक स्कूलों में से 676 स्कूलों में बिजली नहीं है और 238 स्कूलों में लड़कों के शौचालय की कमी है। सरकार ने 2027 तक सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करने का लक्ष्य रखा है।

गु्वाहाटी, 7 मार्च 2026 – असम सरकार ने आज एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया कि राज्य के 44,243 सरकारी‑चलित एवं सहायक स्कूलों में से 676 स्कूलों में अभी तक कोई विद्युत आपूर्ति नहीं है, जबकि 238 स्कूलों में लड़कों के शौचालय नहीं हैं। यह दो प्रमुख अंतर राज्य के कुल स्कूलों में क्रमशः 1.53 % और 0.64 % के बराबर हैं।

बुनियादी स्थिति

डेटा के अनुसार, इन सभी स्कूलों में लड़कियों के शौचालय उपलब्ध हैं और 643 स्कूलों में कार्यरत सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित है, जिससे कुछ हद तक विद्युत की समस्या का समाधान हुआ है। हालांकि, बिजली की पूरी कमी वाले स्कूलों में कक्षाओं का संचालन, डिजिटल उपकरणों का उपयोग और ऑनलाइन शिक्षा जैसे आधुनिक शैक्षणिक उपायों पर गंभीर बाधा उत्पन्न होती है।

सरकारी योजना और बजट

शिक्षा मंत्री रनोज पेगु ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में बचे हुए स्कूलों में बिजली कनेक्शन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 4 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। साथ ही, उन्होंने बताया कि 283 स्कूलों में लड़कों के शौचालयों का निर्माण वर्तमान वित्तीय वर्ष में शुरू किया गया है और मार्च 2027 तक सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएँ पूरी की जाएँगी।

डिजिटल शिक्षा पहल

पेगु के अनुसार, असम की 10,965 स्कूलों में से 10,033 में कम से कम एक डिजिटल लर्निंग सुविधा—जैसे सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) लैब, टेली‑एजुकेशन सेट‑अप या स्मार्ट क्लासरूम—है। शेष स्कूलों को भी इस वर्ष के भीतर ICT लैब प्रदान किए जाएंगे, जिससे अनकवर्ड स्कूलों की संख्या 608 तक घटेगी। यह कदम राज्य के शैक्षणिक अंतर को कम करने और छात्रों को 21वीं सदी की कौशल से सशक्त बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

आगे का रास्ता

बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करने के लिए असम सरकार ने स्पष्ट समय‑सीमा निर्धारित की है, परन्तु कार्यान्वयन की गति, स्थानीय प्रशासन की क्षमता और वित्तीय अनुशासन इस लक्ष्य की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सतत निगरानी और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया गया तो असम के शैक्षणिक संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।